बच्चों को संस्कार देने के लिए अंग्रेजी स्कूल में नहीं बल्कि ऐसे स्कूलों में एडमिशन कराया जाना चाहिए, जहां पर बच्चों को संस्कारित शिक्षा मिले गुरुमती माताजी।

JAIN SANT NEWS सागर

बच्चों को संस्कार देने के लिए
अंग्रेजी स्कूल में नहीं बल्कि
ऐसे स्कूलों में एडमिशन कराया
जाना चाहिए, जहां पर बच्चों
को संस्कारित शिक्षा मिले। गुरुमती माताजी

सागर

पूज्या आर्यिका 105 गुरुमति माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा की बच्चो देने के लिए अंग्रेजी स्कूल में भी नही बल्कि ऐसे स्कूलों में एडमिशन कराया जाना चाहिए  जहां पर बच्चों को संस्कारित शिक्षा मिले।

उन्होंने कि भारतीय संस्कृति का ज्ञान हो। इस बात पर भी जोर दिया की अंग्रेजी स्कूल में बच्चों का एडमिशन नहीं करना चाहिए। जैन समाज को यह सीख दी की जैन समाज की संस्थाओं को स्कूल खोलनाचाहिए और समाज के लोगों कोभी समाज के ही स्कूलों को महत्वदेना चाहिए।

उन्होंने मार्मिक शब्दो में कहा हम अपने बच्चों को ऐसे स्कूलों में भेजते हैं जहां पर सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर के 4 बजे तक बच्चे पढ़ते हैं। क्या खाते हैं, क्या पीते हैं, यहपता ही नहीं है। बच्चे मंदिर भी नहींजाते हैं।

मां शब्द कम बोला जाने लगा है।

पूज्य माताजी ने कहा की भौतिकता की चकाचौंधमें भारतीय संस्कृति का मां शब्द कम बोला जाने लगा है। बल्कि मम्मी का उच्चारण बच्चे ज्यादा  कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन शिक्षा पद्धति अच्छी थी। आजमां बच्चों को जन्म तो दे रही हैंलेकिन अच्छी परवरिश नहीं कररही हैं। अच्छी परवरिश के लिएबच्चों को भारतीय संस्कृति से हीजोड़ना पड़ेगा, अंग्रेजी संस्कृति से नहीं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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