🙏🏻आदरणीय सादर जय जिनेंद्र 🙏🏻
पाण्डुलेख संरक्षण – पेपरमेशी – प्रशिक्षण
पाण्डुलेख कागज, छाल, धातु, ताड़ के पत्ते अथवा किसी अन्य सामग्री पर कम से कम 75 वर्ष पहले हस्त लिखित संयोजन को कहते हैं जिसका धार्मिक, वैज्ञानिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आयुर्वेदिक सौंदर्य परक आदि विषयान्तर्गत महत्त्व हो | ऐसे किसी भी धर्म, इतिहास से जुड़ा कोई भी लेख यदि जीर्ण – शीर्ण अवस्था में है या दीमक लग रहा है तो उसे पूर्णतया प्राकृतिक उपचार से निःशुल्क हम उसे संरक्षित एवं सुरक्षित रखने का कार्य करते है व आपकी मांग पर पुनः आपको वापस लौटाते है !
किसी भी धार्मिक, ऐतिहासिक या सांस्कृतिक महत्व की पुस्तक जिसका आपके घर, कार्य स्थल, मांगलिक पवित्र पूज्य क्षेत्र पर जाने – अनजाने अविनय या अपमान होता है तो उसका दोष, पाप आपको – हमे लगता है व प्रायः उससे बचने के लिए हम उस पुस्तक, ग्रन्थ, किताब आदि को जल धारा में प्रवाहित करते है किन्तु यह भी एक बहुत बड़ा पाप है और हमे लगने वाले दोष का कारण बनता है !
उस अनजाने में होने वाले अपराध से आपको बचाने के लिए हम किसी भी तरह की पूज्य एवं पूरा महत्व की पुस्तक जो वित्सर्जन योग्य है या जिसे आप नित्सर्जित करना चाहते है उसे भी हम स्वीकार करते है और उसको पूर्ण सद्भाव, सेवा से पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से रीसायकल कर लुगदी बना कर मेथी दाना, गोंद, उपजाऊ मिट्टी, मुल्तानी मिट्टी, चुना पाउडर आदि के मिश्रण से तैयार बेस के द्वारा पेपरमेशी के माध्यम से हाई पॉजिटिव, सुपर एनर्जी युक्त धार्मिक – मांगलिक, एंटीक उत्पाद बना कर धर्म ग्रन्थ, पुस्तक को तो अपमान से बचाते ही है साथ ही आपको ऐसे कार्य में सहयोग से महान पुण्य कार्य में सहभागिता का अवसर मिलता है !
पेपरमेशी – प्रशिक्षणहमारे संस्थान के द्वारा बच्चो, बालक – बालिकाओ एवं महिलाओ को 210 रूपए शुल्क के साथ 3 माह का पेपर – मेशी प्रोडक्ट बनाना सीखा कर प्रशिक्षण प्रदान कर सर्टिफिकेट दिया जाता है जिसके माध्यम से आप केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओ के अंतर्गत निःशुल्क या न्यूनतम ब्याज दर पर विभिन्न सहकारी संस्थाओ से आपको नया लघु – गृह उद्यम – व्यवसाय आदि के लिए ऋण लेने की पात्रता मिलती है !
श्री मती प्रीती संकेत जैन
दुगेरिया – 98262 – 44865
समय प्रातः 11 से दोपहर 3 तक
Address – 1st फ्लोर, अकलंक शोध संस्थान, अकलंक स्कूल परिसर, बसंत विहार – कोटा – (Rajasthan) – 324009
