दो संतो का हुआ महासमागम
सागर
गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर कटरा में श्री सिद्धचक्र विधान आहूत हो रहा है इन अनुपम बेला में एक इतिहास और जुड़ गया जब मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज, मुनि श्री प्रणत सागर और मुनि श्री सौम्य सागर महाराज का महामिलन जनसंत मुनिश्री विरंजन सागर से हुआ। दोनों संघ के मुनियों के महामिलन का भक्तो का हजूम साक्षी बना व संपूर्ण समाज ने अभूतपूर्व आगवानी की
विनय भाव का उदाहरण
जब मुनि सुप्रभ सागर महाराज ससंघ मोराजी जैन मंदिर के दर्शन करने के बाद गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर आए तो । दोनों संघ के मुनिराजोंने एक दूसरे के प्रति नमोस्तु किया जो विनय सम्पन्नता का उदाहरण देता है मुनि श्री विरंजन सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित कियाकहा कर्म संसार में किसी को भीनहीं छोड़ते। चाहे वह इंसान, मुनि या
तीर्थकर हो। हम जैसा कर्म करेंगे वैसाही फल प्राप्त होगा। कर्म कभी भी चेहरादेखकर नहीं आता। व्यक्ति द्वारा किया
गया कर्म व्यक्ति को ही भोगना होता है।भक्ति में चमत्कार होता है, भगवान मेंनहीं। अगर आप भक्ति शुद्ध मन से
करते हैं तो निश्चित आपका कल्याण होगा।
जीव कई संकल्प और विकल्प करता है। सुप्रभ सागर
इसके बाद आचार्य विशुद्ध सागरमहाराज के शिष्य मुनि सुप्रभ सागर नेकहा जीव कई संकल्प और विकल्पकरता है।संकल्प और विकल्पों सेरहित होकर पूजा अर्चना फलित होतीहै। व्यक्ति समूह में एक जैसे परिधानमें हो सकता है।किन्तु सभी के भावअलग-अलग होंगे, जो हमारे अंदरविषय, कषायों का जहर है उसे भगवानभी नहीं उतार सकते। आप जैसा करेंगे वैसा ही भरेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
