मुनिराजों का संयम उपकरण है,प्रबुद्ध सागर जी
बनवार
सगरा जिनालय में आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के सुयोग्य शिष्य मुनि श्री 108 प्रबुद्धसाग़र महाराज संघ का पिच्छिका परिवर्तन सम्पन्न हुआ मुनि संघ ने पुरानी पिच्छी संयम ग्रहण करने वाले को प्रदान की व नियम संयम ग्रहण करने वालो के हाथो से नवीन पिच्छीका ली।
इस अवसर पर मुनिश्री ने पिच्छीका का महत्व बताया उन्होनें कहा हर वर्ष चतुर्मास के बाद ही पिच्छी परिवर्तन इसलिए किया जाता है क्योंकि जिस मोर पीछ से पिच्छीबनी रहती उसमें कठोरता आजाती है जिससे जीवों की हिंसाका डर होता है और क्योंकि मोर
अपने पंखों को भी अपनी स्वेच्छा से कार्तिक माह में अपनेपीछ को छोड़ देता है उन्हीं से नईपिच्छी का निर्माण किया जाता है। उन्होनें कहा यह मुनिराजों का संयम उपकरण है,
यह रहे पुण्यार्जक
मुनिश्री को नवीन पिच्छी देने का पुण्य लाभ जयकुमार जैन,अजय जैन, मुन्ना लाल जैन परिवार को मिला। पुरानीपिच्छी प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर दयाचंद कल्पना जैन को प्राप्त हुआ।मंच प्रवक्ता अमन जैन की जानकारी अनुसार कार्यक्रम में आसपास के ग्रामों सहित महानगरों से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
