आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सच है ऐसे महान संत के दर्शन मात्र से अजैन भी बन जाते हैं उनके भक्त और अपनी ओर से जितना भी हो सके जो भी हो सके सेवा करने को रहते हैं हमेशा तत्पर है
संस्मरण
26 मार्च 2010 को वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का आहार एवं रात्रि विश्राम गलसीश्री राम कृष्ण राइस मिल मे हुआ।
मिल के मालिकश्री तुलसी बाबू और उनका परिवार आचार्य श्री एवंसंघ की सेवा में तत्पर है कुँआ नही होने से पैदल पानीलाना पड़ा करीब 3 किलोमीटर दूर से जब मिलमालिक श्री तुलसी बाबू को पता लगा तो उनका दिल भर गया और दुख से उनको बहुत अफसोस हुआउन्होंने आचार्य श्री से कहा “आस बार समय आमारके चांस दीबेन ऐखुनी एक टा कूप करें दीवो”बंगाली में कही बात का आशय यह है कि आने केसमय वापसी में आपको यही ठहरना है मैं तब तककुआं खुदवा कर रखूंगा। सच है ऐसे महान संत केदर्शन मात्र से अजैन भी बन जाते हैं उनके भक्त और
अपनी ओर से जितना भी हो सके जो भी हो सके सेवाकरने को रहते हैं हमेशा तत्पर
वात्सल्य भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
