*वागड़ की नव दीक्षित वयोवृद्ध क्षुल्लिका श्री सत्यमती माताजी की जयपुर में पूज्य गुरुदेव श्री संघ की निश्रा में वीर समाधि मरण-*
जयपुर
डूंगरपुर जिले के पाड़वा निवासी वयोवृद्ध अम्मा हिम्मत देवी धर्म पत्नी स्व.तेजपाल जी विरदावत जिन्होंने 28 वर्षो पूर्व अपने पति के देहांत के उपरांत अधिकांश समय साधु भगवंतो के आहारदन निमित्त सेवा – वैयवृत्ती में निकाला।
ऐसी सुश्रविका हिम्मत देवी अपने इस जीवन के अंतिम क्षणों को त्याग -तपस्या व साधना संयम के साथ बिताकर उत्तम समाधि व आत्म कल्याण के नेक उद्देश्य के साथ पूज्य चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज के पावन चरणो में पधारकर जैनेश्वरी दीक्षा का निवेदन किया । जिनकी अनुमोदना स्वीकृति हेतु उनके जवाई गोवर्धन लाल जी विदावत ,भूपेंद्र कुमार तेजपाल जी विरदावत पाड़वा व सुपुत्री देवी प्रभा गोवर्धन लालजी विदावत भी सम्मिलित थे,विशेष शुभ परिचय की भव्यात्मन हिम्मत देवी संघस्थ बाल ब्रह्म शुभम भैया की नानी जी है।
जिस पर दिनांक 14 अक्टूबर को संध्या:4:00pm शुभ बेला में ब्रह्म हिम्मत देवी को आचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज द्वारा जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की गई।
दीक्षा के पश्चात आपने आचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज के समक्ष समाधि सल्लेखना की साधना हेतु निवेदन किया,जिस पर उसी दिन से आचार्य भगवंत के निर्यापकत्व व श्री संघ की सेवा वैयावृत्ति – आत्म उद्बोधन पूर्वक सल्लेख्ना का महोत्सव प्रारंभ हुआ।
*आपने 11 दिन के निर्जल उपवास,शरीर आत्म के भेद विज्ञान के साथ पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज के चरण मूल में समता भाव पूर्वक दिनांक 24 अक्टूबर दीपावली चौदस के शुभ अवसर पर प्रातः 8 बजकर 20 मिनिट पर अपने देह का त्याग किया।*
*अनेकानेक भव्य जीवो के तारणहार आचार्य देव श्री सुनील सागर जी भगवंत के पावन शुभाशीष को पाकर शव से शिव,आत्मा से परमात्मा,जीव से जिनेद्र,शुद्ध से बुद्ध, सत्यमति से सिद्धात्म तक की पावन यात्रा पर गमन कर चुकी समाधिस्थ क्षुल्लिका माताजी के चरणो में कोटिशः इच्छामी*
*भव सागर से नैया पार कराने वाले आचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज के चरणो में कोटिशः नमन*
*-शाह मधोक जैन चितरी प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
