समर्थवान बनिए,असमर्थ लोगों से तो मार्ग दूषित होता है : आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज

JAIN SANT NEWS रायपुर

समर्थवान बनिए,असमर्थ लोगों से तो मार्ग दूषित होता है : आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज

रायपुर।

सन्मति नगर फाफाडीह में आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज रचित वस्तुत्व महाकाव्य पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन जारी है। संगोष्ठी के दूसरे दिन शुक्रवार को 3 सत्रों में संगोष्ठी का आयोजन हुआ। विद्वानों ने वस्तुत्व महाकाव्य पर अपने-अपने आलेखों का वाचन किया। विशुद्ध वर्षा योग समिति ने संगोष्ठी में शामिल समस्त विद्वानों का सम्मान किया। द्वितीय दिवस संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि बलदेव भाई शर्मा कुलपति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय ने किया। सभी सत्रों के समापन के पश्चात आचार्यश्री ने अपनी मंगल देशना दी।

आचार्यश्री ने कहा कि असमर्थ लोगों से मार्ग दूषित होता है,सभी ये सूत्र जीवन भर याद रखना। जो भी मार्ग दूषित हुए वह असमर्थ लोगों ने किए हैं,समर्थवान कभी मार्ग को दूषित नहीं करता है,दूषित लोगों के द्वारा किए गए दूषित मार्ग को भी जो अदूषित करता है,वह समर्थवान होता है। जो जीव कषाय को नहीं पचा पाते,वे नवीन पंथ बनाते हैं,जो कषाय को पचाना जानते हैं,महाश्रमण महावीर की परंपरा में चलते हैं,चाहे चरित्र से असमर्थ हो,चाहे क्रिया से व कषायों से असमर्थ हो। आप सभी दार्शनिक यहां बैठे हो,विभिन्न पंथों में,विभिन्न संप्रदायों में जो पंथ बने हैं,उन्होंने अपने दार्शनिक परिवर्तन भी किए हैं।

आचार्यश्री ने कहा कि मोक्ष के स्थान पर निर्वाण कहना प्रारंभ किया गया। श्रमणों ने हर समय निर्माण व मोक्ष दोनों का प्रयोग किया है,आज तक हो रहा है। जो अलग सिद्धांत बनाते हैं,प्रभाकर अलग कहते हैं,भाट अलग बोलते हैं,सांक अलग बोलते हैं, न्यायक अलग बोलते हैं,ये तो वैदिक दर्शन है न ? एकमात्र विधि नियोग शब्द पर ही कितने विचार किए हैं,पर जैनाचार्य ने ऐसा नहीं किया है क्योंकि हमने अपने वक्ता को पहले चुन कर रखा है। हमारा मूल वक्ता एक ही है,बाकी व्याख्याता हैं, मूल ग्रंथकर्ता हमारा एक ही है,बाकी व्याख्याता हैं।

आचार्यश्री ने कहा कि विद्वानों ने अपने-अपने आलेखों का वाचन किया है। इन्होंने अपना पुरुषार्थ बराबर किया है,इसमें कोई शंका नहीं है,लेकिन पुरुषार्थी के पुरुषार्थ की प्रशंसा तो कर देना,उसे कभी मत छोड़ना,लेकिन पुरुषार्थी के पुरुषार्थ को देखकर सिद्धांतों पर ध्यान रखना। कोई भाषा का ज्ञानी है उसकी भाषा की प्रशंसा कर देना, अलंकार का ज्ञानी है उसके अलंकार की प्रशंसा कर देना,नीति का ज्ञानी है उसकी नीति की प्रशंसा कर देना, परंतु सभी विद्वान इस बात का जीवन में हमेशा ध्यान रखें कि एक गुण के पीछे शेष अवगुणों को नजर अंदाज कर राजा का चयन मत करना।

*आत्मा को पावन करने वाला ग्रंथ
वस्तुत्व महाकाव्य अद्भुत रचना है : कुलपति बलदेव भाई शर्मा*

विशुद्ध देशना मंडप में जारी अंतर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बलदेव भाई शर्मा कुलपति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय ने किया। उन्होंने आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज एवं मुनिराजों को प्रणाम करते हुए अपने वक्तव्य में कहा कि आचार्यश्री की उपस्थिति में एक ऐसे ग्रंथ पर चर्चा कर रहे हैं जो वास्तव में विश्व कल्याण का मार्ग दिखाता है। एक नई दृष्टि जीवन जीने की कला, जीवन का अर्थ,जीवन सम्यक मार्ग, हम सबके सामने उपस्थित करता है। ऐसा वस्तुत्व महाकाव्य अद्भुत रचना है, आत्मा को पावन करने वाला ग्रंथ है। आज भौतिकता के दौर में तत्व ज्ञान की चर्चा करना बड़ा दुर्लभ हो गया है। पूज्य आचार्यश्री के आशीर्वाद से यह हमको अवसर मिल रहा है और अनेक स्थानों के बड़े-बड़े विद्वान यहां उपस्थित हैं। यह जो वस्तुत्व शब्द है ये बड़ा गहन है, पहली नजर में लगता है पता नहीं दूसरा अर्थ क्या होगा ? पाश्चात्य जगत ने दुनिया को एक सिद्धांत दिया “पदार्थ ही सर्वोपरि है”। ये जीवन उन पदार्थों का अधिकाधिक उपभोग करने के लिए है। पश्चिम की दृष्टि ने आज मनुष्य को परस्पर संघर्ष, स्वार्थ और टकराव के मुहाने पर ले जाकर विनाश की ओर अग्रसर किया है, लेकिन पूज्य आचार्यश्री ने वस्तुत्व की जो व्याख्या की है,वो भारतीय चिंतन परंपरा में,ये जो पदार्थ है,ये केवल उपभोग के लिए नहीं है,पदार्थ की मीमांसा त्यागमयी जीवन में है, अपरिग्रह में है। हमारे जैनाचार्यों ने सम्यक दृष्टि,सम्यक बुद्धि ,सम्यक ज्ञान, एक जो जीवन का सम्यक रूप प्रस्तुत किया, वास्तव में वस्तुत्व उसका समुच्चय है। जिसने वस्तुत्व के अर्थ को समझ लिया उसका जीवन वैराग्य पूर्ण, त्याग पूर्ण, लोक हितकारी,इस प्रकार की दृष्टि से युक्त हो जाता है।
*दूसरे दिन 3 सत्रों में हुआ अंतर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन*

विशुद्ध वर्षा योग समिति के अध्यक्ष प्रदीप पाटनी व महामंत्री राकेश बाकलीवाल ने बताया कि 20 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक तीन दिवसीय वस्तुत्व महाकाव्य पर अंतर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी का संचालन इंजीनियर दिनेश कुमार जैन भिलाई ने किया। दूसरे दिन प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति बलदेव भाई शर्मा थे। अध्यक्षता डॉ. जयकुमार जैन ने की। सारस्वत अतिथि डॉ. सनत कुमार जयपुर थे। मुख्य अतिथि कुलपति डॉ. शर्मा ने संगोष्ठी का शुभारंभ किया। प्रथम सत्र के वक्ता डॉक्टर नरेंद्र कुमार जी टीकमगढ़, प्रोफेसर फूलचंद जी प्रेमी वाराणसी, डॉ. सनत कुमार जी जयपुर, डॉक्टर महेंद्र कुमार जैन मनुज इंदौर,राजेंद्र पटोरिया, जय कुमार जी मुजफ्फरपुर नगर ने आलेख का वाचन किया।

इसी तरह दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर अशोक कुमार जैन वाराणसी ने की। सारस्वत अतिथि डॉ. कुसुम पटोरिया नागपुर थीं। द्वितीय सत्र के वक्ता डॉक्टर जैनेंद्र जैन इंदौर, प्रोफेसर शांतिलाल बड़जात्या इंदौर, पंडित जयकुमार शास्त्री दुर्ग,पंडित अक्षय जैन मुंबई, डॉक्टर देवकुमार जी रायपुर एवं डॉ कुसुम पटोरिया नागपुर ने आलेख का वाचन किया। इसी प्रकार तृतीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. सनत जैन जयपुर एवं संचालन डॉ. पंकज जैन ने किया। तृतीय सत्र के वक्ता डॉ. निर्मल कुमार जैन, प्रोफेसर राजेश जैन भिंड, डॉक्टर यतीश जैन जबलपुर, पंडित लोकेश जैन बांसवाड़ा, पंडित सुनील जैन भिलाई,पंडित नितिन शास्त्री रायपुर, पंडित शिखरचंद जी भिलाई ने आलेख का वाचन किया। संगोष्ठी का तृतीय एवं अंतिम दिवस शनिवार को रहेगा। विदित हो कि अंतर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के पूर्व दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय श्रमण संगोष्ठी का आयोजन आचार्यश्री के रचित वस्तुत्व महाकाव्य पर किया गया था। इस पांच दिवसीय संगोष्ठी में प्राप्त सुझावों पर अमल कर अप्रकाशित वस्तुत्व महाकाव्य ग्रंथ को पूर्ण शुद्धि के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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