धर्म के साथ मुझे आंसू भी कबुल है और अधर्म के साथ ऐशो आराम भी पसंद नहीं है ऐसा भाव लाना सुधासागर महाराज

JAIN SANT NEWS ललितपुर

धर्म के साथ मुझे आंसू भी कबुल है और अधर्म के साथ ऐशो आराम भी पसंद नहीं है ऐसा भाव लाना सुधासागर महाराज

ललितपुर

-एक व्यक्ति रात भर सोया नहीं रात भर गाड़ी चलाई तो सोना जरुरी है इसलिए मन्दिर नहीं आया कोई बात नहीं ड्राइवर है, आफत का मारा है। धर्म कहता है कि इसको सोने दो धर्म को क्या समझ रखा है धर्म कहता है कि महाराज कहते हैं ड्राईवर से जा सोजा यदि वे विवेकवान है तो वो समय उसे सोने को दिया। इसलिए सभी सुरक्षित आ गये मैं उसकी बात कर रहा हूं जो शाम से सो रहा है बहुत बड़ी बात है।
पूज्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा की महानुभाव मोटीवेशन जिसके पास है,धन दौलत है, व्यापार ज्यादा चल गया तोपुण्य का उदय है। कि मैं मन्दिर तक नहीं आ पाया भगवान से कहना प्रकृति से कहना कि मुझे ऐसा क्यों व्यापार इतना अधिक क्यों दे दिया कि मैं आपका अभिषेक तक नहीं कर पाया। जव पापानुबंधी पुण्य तुम्हारे पास होता है तो वह पुण्य तुम्हारे लिए मन्दिर नहीं जाने देगा।

उन्होनें कहा श्री रामचन्द्र जी पुण्यवान थे? या रावण पुण्यवान है। लोगों की धारण बन गई कि जो धर्म करेंगा उसे दुःख का सामना करना पड़ेगा। श्री रामचन्द्र जी का उदाहरण सामने है राम का वचन नहीं था, पिता का वचन था। चाहते तो कह देते कि वे वन को गमन नहीं करेंगे।सिर्फ धर्म के कारण उन्होंने वनवास के कष्ट उठाये।रावण के रास्ते पर चलोगे धन ही धन मिलेगा धर्म के साथ मुझे आंसू भी कबुल है। और अधर्म के साथ ऐसों आराम भी पसंद नहीं है। पिक्चर में आप देखते हैं कि खलनायक पूरी पिक्चर में मर्डर हिंसा सब कुछ करता है, फिर भी उसके पास धन दौलत

ऐशोआराम सब उसके पास होता है आप देखते हैं कि पुरी पिक्चर में खलनायक ऐश करता है।और अंत में पांच मिनिट में खलनायक का अंत हो जाता है। हीरो के सुख के दिन आ जाते हैं। हीरो के सुख के दिन आते ही पिक्चर खत्म हो जाती है। आप भी बाहर आ जाते हैं। आप ही फ़ैसला करे कि आपको क्या पसंद है फैसला करना है? क्या बनना है? किसी ज्योतिषी से पूछने की आवश्यकता नहीं है। आप स्वयं ही निर्णय कर लेना आपको अच्छा आदमी मिलें और आपके मन में अच्छा आदमी बनने का भाव आ जाये तो समझ लेना आप अच्छे हैं। एक पापी को देख कर पाप करने का भाव आ जाता है उसी आदत को बदलना है

उन्होंने कहा कभी किसी त्यागी को देखकर त्याग का भाव आ जाये रात्रि भोजन छोड़ने वाला गुटका छोड़ने वाले को देख कर छोड़ दें तोसमझ लेना अब तुम्हारे अच्छे दिन आने वाले हैं।

उन्होंने कहाअच्छे-बुराई के बीच में आप कितने दिन टिक पाये? अच्छी जगह तो पापी भी अच्छा हो जाता है। मन्दिर में तो पापी भी अच्छा हो जाता है। आज तुम्हारी आंखें धन्य हो गई सबाल ये नहीं है कि आपने अच्छे आदमी को देखकर कितने देर अच्छे रहते हो आप कितने दिन तक अच्छे रहते हैं मन्दिर से मुड़ते हैं तब अच्छी है आगे बढ़ते हैं घंटा बजता है उसकी झंकार आतीं रहतीं हैं आपने प्रवचन सुने उनकी झंकार कितने समय तक आती है ये देखना है।
एक तो कर्म का मारा है, एक वो है जो करोड़ों का व्यापार है वह बिना मोबाइल चलाये भोजन नहीं कर सकता। कर्म कहता है कि इसके पास पुण्य तो है,ऐसा पुण्य नहीं है कि भगवान का अभिषेक कर सकें।धन सम्पन्न होते हुए भी ये भगवान से दूर रहें तो इसको कामों में इतना उलझा दो कि ये मन्दिर ही नहीं आ पाये। बड़े आदमी नास्तिक होते हैं गरीब आदमी से धर्म करना कोई बड़ी बात नहीं है। एक अमीर आदमी को चार माह में भी अभिषेक का कलश नहीं कर पाया। अमीरों के बच्चे मन्दिर आते नहीं है आज जाये तो भगवान का अभिषेक नहीं करते। दस दिनों से आप संस्थान की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे।

उन्होनें सांगानेर संस्थान का जिक्र किया आज भी ताली तो बजा दी। पुरूस्कार भी दिया।अपने बेटे बिटिया सांगानेर संस्थान में पढ़ाई करके आयेगा तो वो बेटा संस्कारवान होगा। तुम्हारे कुल का नाम रोशन करेंगा।

उन्होनें यह भी कहा -घर मे पहले पैसा कम था। तो घर मे सब साथ में भोजन करते थे। लेकिन जब से घर में पैसा आया साथ में बेठकर भोजन नही करते। शांति से भोजन नही करते,परिवार को समय नहीं दे पा रहे है। अब ऐसा पैसा क्या काम का जो परिवार को समय नहीं दे पाया।

आगे कहा इस दुनिया मे ऐसी वस्तुए है जो पूर्ण है वह हीनाधिक नही होती है। जो सदाबहार एक समान रहते है। किंचित मात्र भी हीनाधिकता नही आती है।

पुर्णता का अनुभव अब कुछ देखना बाकी ही जानना बाकि नही पुर्ण जान लिया भगवान ने सब कुछ देख लिया, कुछ और देख रहे इसका मतलब जो अभी देख रहे हो उसका आनंद नहीं आ रहा है। हमें जो मिला है। उसका आनंद नही। जो प्राप्त हैं
अच्छे दिनों में धर्म करो

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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