पूज्य मुनि श्री अजित साग़र जी महाराज के हुए केशलोच
टिकटोली
प,पू विश्व वन्दनीय आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज गुरुदेव के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य परम पूज्य मुनि श्री 108 अजितसागर जी महाराज के प्रातः बेला में श्री 1008 शांन्तिनाथ त्रिमूर्ति दिगम्बर ,जैन प्राचीन अतिशय क्षेत्र टिकटोली (दूंमदार) जौरा जिला-मुरैना (मप्र)में केशलोंच हुए..भगवान महावीर स्वामी जी कहते है की “हाथो से बालों को उखाड़ना शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि शरीर की उत्कृष्ट साधना शक्ति का परिक्षण है,।
शरीर के बालों को हाथों से उखाडऩा केशलोचन कहलाता है। दिगंबर मुनिश्री जी/ऐलक जी को हर 2-4 माह में केशलोंच करना अनिवार्य है क्यूंकि जब दाढ़ी और मस्तक, मूँछ के केश बड़े होते है तो उनमे छोटे छोटे जीव उत्पन्न होने लगते है,।
केशलोंच शरीर के प्रति राग भाव के त्याग का प्रतीक है। जब शरीर के प्रति ममत्व नही रहता तो संसार से भी मोह टूटता है। घने बालो से जीवो की हिंसा न हो ,यह अहिंसा व करुणा की भावना केशलोंच में निहित रहती है। दिगम्बर संत शरीर के ममत्व को छोड़कर घास के सामान अपने सिर दाढ़ी और मुछो के बालो को उखाड़कर केशलोंच करते है। केशलोंच वैराग्य पथ की कठिन परीक्षा है। यह साधू की सहनशक्ति और वैराग्य का भी प्रतीक है।

दिगम्बर संत अनुकूलता- प्रतिकुलता, सरसता- नीरसता में भी समता भाव को नही त्यागते।राग द्वेष से रहित आत्मा के प्रति अनुराग ही संत की निशानी है।।
ब्र.रविन्द्र भैया कोटा व रितेश राजेश मिडला बीना से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
