पडगाहन विधि नही मिलने से हुआ उपवास ,संयम भूषण चतुर्थ पट्टाचार्य श्री के खिले केसरी चरण चिन्ह -पडगाहन विधि नही मिलने से हुआ उपवास ,संयम भूषण चतुर्थ पट्टाचार्य श्री के खिले केसरी चरण चिन्ह
जयपुर
राजस्थान की राजधानी जयपुर में वर्षायोगरत तपस्वी सम्राट के बेमिसाल नंदन राष्ट्र गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी यतिराज आज दिनांक 14 अक्टूबर को भट्टारक जी की नसिया में आहार चर्या हेतु निकले तो लगभग सभी चोको तक तीन -चार भ्रमण में भी संकल्प विधि नही मिली,जिस पर आचार्य श्री मंदिर की तरफ जाने लगे लेकिन श्रावको के अत्यंत अनुरोध पर उन्होंने सम्पूर्ण चोको तक एक भ्रमण ओर किया,
फिर भी विधि नही मिली। जिस वजह से आचार्य श्री का आज उपवास हुआ।यही है तो दिगम्बर गुरु की साधना और पूज्य गुरुदेव अत्यंत शांत,सहज रूप से अपने ध्यान सामयिक क्रिया में अग्रसर हो गए।
वही दोपहर के सामयिक के पश्चात आचार्य श्री जब अपने कक्ष से निकले तो जहां जहा उनके चरण पड़े वहा स्वतः केसरी चरण चिन्ह खिल उठे। ऐसे दिगंबर जैन तपस्वी संतो की ऐसी पवित्र साधना को देखकर समूचा जयपुर नत मस्तक है।
तप त्याग की अदभुत मूरत हो
है धन्य धन्य महिमा तेरी तम हरने वाले सूरज हो
-शाह मधोक जैन चितरी से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
