सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के चौथे दिन सप्तम पूजन के अर्घ्य चढ़ाये
पिडावा : –
नगर के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन जुना मंदिर नवीन जिनालय





खंडूपुरा में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के सप्तम पूजन के 512में से 256गुणो के अर्घ्य चढ़ाएं गये जैन समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि पिड़ावा नगर में गत आठ माह से ज्ञान की गंगा बहा रहे व43वां चातुर्मास कर रहे परम पूज्य 108 श्री भूतबलि सागर, मुनि सागर,मोन सागर, मुक्ति सागर महाराज के पावन सानिध्य में यह विधान सुकुमाल जैन, निर्मला जैन परिवार की ओर से आयोजित व सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन मंजुला दीदी व विधानचार्य पंडित मुकेश जैन सुसनेर के कुशल निर्देशन में सिद्ध प्रभु की आराधना की जा रही है जिसमें संगीतमय अभिषेक, शांतिधारा, जाप अनुष्ठान, नित्य नियम पूजन, विधान की पूजन श्रावक श्राविकाओं द्वारा भक्ति भाव के साथ की जा रही है महाराज जी के प्रवचन नित्य प्रतिदिन प्रातः बड़े मंदिर में और दोपहर में नवीन जिनालय खंडूपुरा में हो रहे हैं दोपहर में भूतबलि सागर महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि जैन शास्त्रों में सिद्धचक्र महामंडल विधान का विशेष महत्व है क्योंकि हमारा चरम लक्ष्य सिद्ध दशा प्रकट करना है और इस विधान में सिद्ध भगवान का विस्तृत गुणानुवाद किया गया है,जो संसार के बंधनों से छूट गए हैं जिनमें अनंत दर्शन, अनंत ज्ञान, अनंतसुख, और अनंत वीर्य प्रकट हो गये हो जो द्रव्य कर्म,भाव कर्म, और नो कर्म से सवर्था रहित हो गये हो उन्हें सिद्ध कहते हैं ऐसे अनंत सिद्ध परमात्मा लोक के अग्रभाग में विराजमान हैं सिद्धों का समुदाय ही सिद्धचक्र कहलाता है और इस सिद्धचक्र विधान में सिद्ध दशा प्रकट करने का उपाय बतलाते हुए सिद्धो का गुणानुवाद किया गया है रात्रि में संगीतमय आरती व जिनेंद्र भगवान की भक्ति की गई उसके बाद दीदी के प्रवचन हुवे प्रवचन के बाद बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
