जयपुर के मुनिभक्त गुमानमल जैन ने दिगम्बर जैन संतों के हस्तलिखित आशीर्वचनों का संकलन कर अनूठी मिसाल कायम की
जयपुर
मालवीय नगर, जयपुर निवासी 90 वर्षीय गुमानमल ने 1981 से अब तक 22 आचार्य 66 मुनि 31 आर्यिकाओं के हस्तलिखित आशीर्वचनों का संकलन कर अनूठी मिसाल कायम की है।
राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन ‘कोटखावदा’ ने बताया कि दिगम्बर जैन साधुओं के पास

जाने,उनकी वैयावृत्ति करने में ये अपनी बीमारी तक भूल जाते हैं, एक अद्भुत शक्ति का संचार हो जाता है। ये भोजन ग्रहण करते समय मौन रखते हैं,अपनी जूंठी थाली स्वयं उठाकर रखते हैं।

णमोकार मंत्र लेखन के लिए काॅपियां छपवाकर निःशुल्क वितरित करते हैं,और अपने सम्पर्क में आने वाले लोगों को इसके लिए प्रेरित करते हैं।
स्वयं भी नियमित रूप से णमोकार मंत्र लिखते हैं।
अब तक दो लाख से अधिक णमोकार मंत्र के जाप लिख चुके हैं।
अपनी आवश्यकताएं सीमित रखते हैं,अधिकाधिक दान देने में यकीन रखते हैं।
इनकी पत्नी कोकिला जैन एक आशु कवियत्री थीं, जिनका 30 जनवरी 2021 को देहांत हुआ।

साधुओं के सम्मान में तत्काल मंगलाचरण लिखना और बोलना उनकी रूचि थी।उनकी 800 से अधिक प्रकाशित रचनाएं हैं,जो जैन महिलादर्श आदि पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

इनके 2 पुत्र और 2 पुत्रियां हैं।
बच्चे और बच्चों का सारा परिवार धार्मिक भावनाओं और आचरण से ओत-प्रोत है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
