उनके अल्फाज में आगम को मुखरते देखा
उनके होठों से समयसार
को झरते देंखा
वो कुंद कुंद की वाणी के*गुरुवर गणधर
ये विधा सागर वही जो
कभी थे विधाधर
जब से रखा है ये सर
उनके पाक कदमो पर
संवर गई मेरी तकदीर
उनकी रहमत पर
सन्त शिरोमणि गुरुदेव की जय जय हो

Jain Sant
उनके अल्फाज में आगम को मुखरते देखा
उनके होठों से समयसार
को झरते देंखा
वो कुंद कुंद की वाणी के*गुरुवर गणधर
ये विधा सागर वही जो
कभी थे विधाधर
जब से रखा है ये सर
उनके पाक कदमो पर
संवर गई मेरी तकदीर
उनकी रहमत पर
सन्त शिरोमणि गुरुदेव की जय जय हो
