अल्फाज में आगम को मुखरते देखा

JAIN SANT NEWS काव्य रचना

उनके अल्फाज में आगम को मुखरते देखा
उनके होठों से समयसार
को झरते देंखा
वो कुंद कुंद की वाणी के*गुरुवर गणधर
ये विधा सागर वही जो
कभी थे विधाधर
जब से रखा है ये सर
उनके पाक कदमो पर
संवर गई मेरी तकदीर
उनकी रहमत पर
सन्त शिरोमणि गुरुदेव की जय जय हो

जम्बू जैन ठकुराई

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