क्षमा मांगकर आज के दिन को सार्थक करे चिंतनमति माताजी
शाहगढ़
झंडा चौक पर क्षमावाणी पर बोलते हुए आर्यिका 105 चिन्तनमति माताजी ने धर्मसभा में कहा कि क्षमावाणी पर्व पर हुई वर्षा से शुद्धि करण होना ही यह सिद्ध होता है कि आपके पर्यूषण पर्व बहुत ही अच्छे से संपन्न हुए। दस दिन में हम सब कुछ सीख चुके फिर भी हम क्षमावाणी मनाते हैं। आर्यिकाश्री ने कहा कि क्षमा अपने जीवन में उतारना चाहिए, हमें जिससे क्षमा मांगना चाहिए लेकिन हम मांगते किसी और से है,

हम क्षमा उन्हें मांगते हैं जिन से कोई अपराध नहीं हुआ जबकि क्षमा उनसे मांगो जिनसे हमारा ही वर्षों से वैमनस्यता बनी है उनसे क्षमा मांग कर आज के दिन को सार्थक करें, हमें उसी से क्षमा मांगना हैं जिनसे हमारी वास्तव में बुराई है बोलचाल बंद है, जब तक हमारे अंदर क्रोध मान रहेगा

हम क्षमा नहीं मांग सकते हमें खुद को सहज सरल बनाना होगा तभी हम क्षमा मांग सकते हैं। दूसरों के कहने पर क्षमा मांगने वाला क्षमाधारी नहीं बनता, क्षमा भाव अंतरंग में हो वही क्षमा धारी बन सकता है, भाई कैसी ने कहा कि गले उनसे मिलो जिनसे आपकी बुराई क्लेश कलुषता है, जब ऐसे दो हृदय गले मिल जाते हैं तभी आज का क्षमा वाणी पर्व सार्थक होगा, जहां शर्त हो वहां क्षमा नहीं हो सकती।
चुके फिर भी हम क्षमावाणी मनाते हैं। आर्यिकाश्री ने कहा कि क्षमा अपने जीवन में उतारना चाहिए, हमें जिससे क्षमा मांगना चाहिए लेकिन हम मांगते किसी और से है, हम क्षमा उन्हें मांगते हैं जिन से कोई अपराध नहीं हुआ जबकि क्षमा उनसे मांगो जिनसे हमारा ही वर्षों से वैमनस्यता बनी है उनसे क्षमा मांग कर आज के दिन को सार्थक करें, हमें उसी से क्षमा मांगना हैं जिनसे हमारी वास्तव में बुराई है बोलचाल बंद है, जब तक हमारे अंदर क्रोध मान रहेगा हम क्षमा नहीं मांग सकते हमें खुद को सहज सरल बनाना होगा तभी हम क्षमा मांग सकते हैं। दूसरों के कहने पर क्षमा मांगने वाला क्षमाधारी नहीं बनता, क्षमा भाव अंतरंग में हो वही क्षमा धारी बन सकता है, भाई कैसी ने कहा कि गले उनसे मिलो जिनसे आपकी बुराई क्लेश कलुषता है, जब ऐसे दो हृदय गले मिल जाते हैं तभी आज का क्षमा वाणी पर्व सार्थक होगा, जहां शर्त हो वहां क्षमा नहीं हो सकती।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
