प्रतापगढ़। नया मंदिर में चातुर्मास कर रहे आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज और अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर जी महाराज ने दशलक्षण महापर्व के अवसर पर 10 दिवसीय निर्जल उपवास की साधना की है। इनके साथ ही आचार्य के संघस्थ दीदी शैली के साथ 27 श्रावक-श्राविकाओं ने दस, एक ने 8 उपवास, 9 श्रावकों ने पांच उपवास की साधना भी की है। इन उपवास करने वालों में प्रतापगढ़ और बाहर से आए श्रावक-श्राविकाएं शामिल हैं। वहीं किरण महेंद्र वागेरिया और प्रिया सुरेश जैन ने 16 दिवसीय उपवास की साधना की है। इसके साथ ही अजैन आदिवासी भैरव ने भी 10 दिवसीय उपवास की साधना की है। भैरव लाल मीणा बीते 33 साल से उपवास कर रहे हैं।
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज बीते सात वर्ष से दशलक्षण पर्व पर निर्जल उपवास कर रहे हैं। उपवास के बावजूद वह भी प्रतिदिन प्रवचन, अभिषेक, आरती आदि में सानिध्य प्रदान करते थे। वहीं अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने पहली बार दस दिवसीय निर्जल उपवास की साधना की है। पूज्य सागर महाराज का बीते तीन अगस्त से अन्न त्याग चला रहा था। इसके बाद से उन्होंने 31 अगस्त से जल का भी त्याग कर 10 दिवसीय उपवास की साधना की है। मुनि श्री बीते 48 दिन से मौन साधना कर रहे हैं और गुरुवंदना के अलावा कमरे से बाहर नहीं निकले हैं। वह स्वाध्याय कर रहे हैं। मुनि श्री की मौन साधना के साथ भक्तामर विधान, सहस्त्रनाम आराधना चल रहे हैं, जो आगामी 19 सितम्बर तक जारी रहेंगे। मुनि श्री का अन्न त्याग भी तब तक जारी रहेगा। मुनि श्री आज जल ग्रहण करेंगे। उल्लेखनीय है कि मुनि पूज्य सागर बीते 12 वर्ष से 48 दिवसीय मौन साधना कर रहे हैं।
मुनि सेवा समिति के तेजस तलाटी ने बताया संघ में अन्य साधुओं में से भी किसी ने एक, दो, तीन उपवास की साधना की है। दस दिन में प्रवचन, सांस्कृतिक, अभिषेक इत्यादि कार्यक्रम भी संपन्न हुए। कार्यक्रमों में विजेताओं रहे समाज जनों को मुनि सेवा समिति की ओर से पुरस्कृत किया गया। दस उपवास करने वाले श्रावकों का जुलूस भी निकाला गया। आज 16,10, 5 उपवास करने वालों का मुनि सेवा समिति एवं समाज की ओर से अभिनंदन और स्वागत भी किया जाएगा।
