महरौनी (ललितपुर)। जैन श्रद्धालुओं ने अनंत चतुर्दशी का पर्व सादगीपूर्वक व्रत और पूजन कर मनाया। इसी के साथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर श्री 1008 वासुपूज्य भगवान का मोक्षकल्याणक दिवस धर्म प्रभावना के साथ मनाया गया। पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के दसवें दिन अनुयायियों ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को अंगीकार किया। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा की गयी। फिर पूजन करने के बाद अर्घ्य चढ़ाए गए। प्रातः कालीन बेला में भगवान जिनेन्द्र की विमान यात्रा निकाली गयी। स्वर्ण और रजत विमान में विराजमान भगवान जिनेन्द्र की भक्तजनों ने मंगल आरती की। रंगोली से घरों के बाहर सजाया गया। विमान यात्रा बडे मंदिर से प्रारम्भ होकर मुनि श्री सुधासागर द्वारा सृजित अतिशय तीर्थ क्षेत्र सर्वतोभद्र पहुंची, जहां श्रीजी का अभिषेक बड़े धूमधाम से किया गया। इसके बाद विमान जी पुनः बडे मंदिर की ओर आये। शाम को भी जल विहार की शोभायात्रा निकली और भगवान जिनेन्द्र का बड़े मंदिर में अभिषेक किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सकल दिगम्बर जैन समाज का योगदान रहा। अखिल भारतीय महिला परिषद द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया और दशलक्षण महापर्व में हुई प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले बच्चों और महिलाओं को पुरस्कार वितरित किये गए।
