कल संस्कार शिविर के समापन पर निकलेगी विशाल यात्रा

JAIN SANT NEWS ललितपुर

कल संस्कार शिविर के समापन पर निकलेगी विशाल यात्रा

धर्मोदय तीर्थ गोलाकोट में तीन हजार दीपों से महा आरती की

ललितपुर

-संसार की बहुत विचित्र स्थिति है भोग के पीछे तुम दौड़ोगे भोग भागता जायेगा तुम भोगों को छुड़ोगे तो भोग तुम्हारे पीछे घूमेंगे तुम भोगों को छोड़ दो तुम किस क्षेत्र में हो किस कुल में जन्मे हैं बड़े आदमी किसी के पीछे नही घूमता बड़े आदमी के पीछे सब आदमी घुमते है तुम निमित्त के आधीन मत हो जिंदगी का फैसला करो कैसा दिन चाहते हो सारी दुनिया के पीछे तुम जाओगे या सारी दुनिया तुम्हारे पीछे चलने लग जाये ऐसा कुछ करना है इस जीवन में तुम शिविरार्थी थे सब कुछ बिना मांगे मिला अब कल से क्या होगा किमक्षिक ज़िंदगी को यूं ही मत लुढ़कने दो जैसा तुम्हारे लिए बनना है केसी जिंदगी जीना चाहते हैं आठ वर्ष के बाद ये उससे पूछा जाता है दुसरे जब वह बालिग होने पर गुरु पूछ्ते है कैसा जीवन जीना चाहते हो तो गुरु बताते है श्रावक बनकर या मुनि बनकर जीवन जीना चाहते हैं निर्णय तुम्हारे लिए करना है जिंदगी कैसी बनना है तुम्हारी जिंदगी का अंतिम लक्ष्य क्या है बीच की कहानी नहीं पूछ रहा जिंदगी का अंतिम लक्ष्य बनाओ ये बन जाओगे तो मंजिल की ओर बढ़ना शुरू कर दो तो एक दिन लक्ष्य को प्राप्त कर लोगे उक्त आश्य के उद्गार मुनिपुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।
*विश्व शांति के लिए निकलेगी शोभायात्रा*
मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि परम पूज्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में चल रहे 29वे श्रावक संस्कार शिविर का कल भव्य समापन होगा जिससे प्रातः काल की वेला में भगवान के अभिषेक पूजन के वाद पाडना उपरांत शिविरार्थियों के हाथों में सफेद ध्वज के साथ जिन वंदना शौभायात्रा अभिनन्दनोदय तीर्थ शिविर स्थल से प्रर्रभ हो कर नगर भ्रमण कर वापिस आयेगी जहां दोपहर में भव्य समापन समारोह आयोजित होगा
*महाआरती में झूमे भक्त*
गत शाम को धर्मोदय तीर्थ गोलाकोट तीर्थ की वंदना करने का सौभाग्य सभी शिविरार्थी को मिला जहां प्रथम महा आरती करने सौभाग्य अजित कुमार विवेक कुमार गदयाना परिवार को मिला इसके साथ ही शिविर निर्देशक हुकम काका कोटा तीर्थ कमेटी के अध्यक्ष आई पी एस एस के जैन दिल्ली कायर्अध्यक्ष राकेश जैन वस्तु विद सतेन्द्र जैन राजधानी मील ने ये विशेष सौभाग्य प्राप्त किया इस दौरान शिविर संयोजक राजीव लकी अविनाश जैन विवेक सिंघई के साथ तीन हजार शिविरार्थियों ने मनोज भ इया के भजनों पर महा आरती की
.*निमित्त के आधीन नहीं रहना पुरूषार्थ करना*
मुनिश्री ने कहा कि जैसा निमित्त मिला वैसा बन जातें हैं तुम कौन हो सब पर के सापेक्ष हों पिता है तो पुत्र बन गये बहन हैं सो भाई हों गये भगवान है सो भक्त वन गया है कुछ ऐसा करों कि सदा शिविरार्थियों की तरह रह सको क्या कभी तुम स्वतंत्र हो पायेगा हमारा जन्म भारत में क्यों, जिस कुल जिस जाति में जन्म हो जाये जो जहां जैसा होता है हो जाये वह व्यक्ति निगोद जायेगा जैन जन्म मे जन्म लेना वाला सभी कार्य कर सकता हैं भगवान,मुनि,राजा व सभी कार्य कर सकता है किमक्षिक वरदान मांगा लो क्या मांगना है फैसला आप के हाथ है अपनी जिंदगी को निमित्त के भरोसे मत करो तुम अपनी जिंदगी लुढ़कने मत दो तुम भोंग्य नहीं हो भोक्ता हो जिंदगी को यूं ही मत जाने दो फ़ैसला हमारे हाथ में है
*हमें लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना है*
-उन्होंने कहा कि एक भाव होता है फिर आता है स्वभाव किसी भी कार्य को करने के पहले होता है निर्देश प्रायः प्रायः सभी की जिंदगी लुढ़क रहीं हैं बोले कहा जा रहें हों स्टेशन जा रहा हूं जाना कहां है जहां का टिकट मिल जाए ऐसा नहीं होना चाहिए क्यों तुमने जन्म लिया कहा जन्म लिया किस कुल में जन्म लिया है तीन लोक कही भी जगह ख़ाली नहीं वह निगोद में जगह ख़ाली हैं हमें निगोद नहीं जाना हमें लक्ष्य बनाना है जन्म जन्म का पुण्य लेकर आये है जैन कुल में जन्म लेने वाले दुनिया में तुम जो करना चाहो कर सकते हैं एक भी कार्य ऐसा नहीं है जिसमें पांबदी लगी हो राजा बन सकते हो महाराजा बन सकते हैं चक्रवर्ती तीर्थंकर राजा महाराजा त्यागी व्रति सब कुछ बन सकते हैं

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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