दिगम्बर जैन मन्दिर में पधारीं श्वेताम्बर साध्वी

JAIN SANT NEWS दिल्ली

दिल्ली। श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, रानी बाग में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व के पावन पुनीत प्रसंग पर प्रथम बार श्वेताम्बर साध्वी उत्तर भारतीय प्रवर्तिनी, श्रमणी सूर्या, डॉ. श्री सरिता जी म.सा. आदि ठाणे का मंगल आगमन उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर हुआ। समस्त जैन समाज द्वारा साध्वीश्री का भावभीना स्वागत कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया गया। साध्वीश्री जी ने मूलनायक शान्तिनाथ भगवान की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन कर असीम आनंद की अनुभूति की। इस अवसर पर गुरुभक्तों ने साध्वीश्री के चरणों में भजनों के माध्यम से भक्तिभाव सहित नमन किया।
धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए गुरुणी जी ने कहा कि धर्म के दशलक्षण – उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य, इनकी मन-वचन-काय की एकाग्रता पूर्वक आराधना करने से अष्ट कर्मों का नाश होता है। जीवन में त्याग का विशेष महत्व है। मां का त्याग संतान के विकास का कारण बनता है, नेता का त्याग राष्ट्र के विकास में सहयोगी होता है, साधु का त्याग समाज का विकास करता है और समाज का त्याग एक-दूसरे का सम्बल बनता है। भक्तों की भावना ही भगवान से मिलने में सहायक होती है।
आप चाहें मन्दिर जाएं या स्थानक जाएं, माध्यम कोई भी हो परन्तु कम-से-कम तीर्थंकर भगवंतों का स्मरण करें, पंच परमेष्ठि भगवंतों को नमन करें,, जिनवाणी का रसपान करें। बाहरी क्रियाओं में बेशक अंतर हो सकता है परन्तु अंतरंग में सब एक हैं। मतभेद हो सकते हैं, परन्तु मनभेद नहीं होंगे। यदि दिगम्बर संस्कृति ना होती तो आज हमें जैन धर्म की प्राचीनता का पता न लगता और यदि श्वेताम्बर संस्कृति ना होती तो आज देश के कोने-कोने में संतों के दर्शन सुलभ न हो पाते। आज यहां दिगम्बर जैन समाज ने जिस श्रद्धा व भक्ति से श्वेताम्बर संतों की अगवानी कर विनयगुण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है, वह अवश्य ही अनुमोदनीय है।

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