सनावद। दिगंबर जैन मंदिरों में पर्युषण पर्व के छठे दिन उत्तम तपधर्म के अवसर पर चारों ओर धूप की भीनी-भीनी और सुगंधित खुशबू बिखरी रही। सभी समाजजनों ने सुगंध दशमी (धूप दशमी) का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया। भाद्रपद में शुक्ल पक्ष की दशमी को यह पर्व मनाया जाता है।
सन्मति जैन काका ने बताया इस अवसर पर शीतलधाम की अधिष्ठात्री सविता दीदी ने धूप दशमी का महत्व बताते हुए कहा कि जैन मान्यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली सुगंध दशमी का काफी महत्व है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के अशुभ कर्मों का क्षय होकर पुण्यबंध का निर्माण होता है तथा उन्हें स्वर्ग, मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान जैन मंदिरों में जाकर भगवान को धूप अर्पण करते हैं, जिसे धूप खेवन भी कहा जाता है, जिससे सारा वायुमंडल सुगंधमय होकर स्वच्छ और खुशनुमा हो जाता है।
इस अवसर पर सनावद के सभी जैन मंदिरों एवम णमोकार धाम सहित सिद्धाचल पोदन पुरम, ओंकारबाग मोरटक्का में सभी भक्तों ने भक्ति भावों से धूप खेवन कर धूप दशमी का पर्व मनाया।
