झुमरी तिलैया (कोडरमा), 4 सितंबर। जैन धर्म का सर्वोच्च पर्व दसलक्षण पर्यूषण का पांचवां दिन जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया। झुमरी तिलैया में धर्म और ज्ञान की गंगा बहा रहे महासंत जैन मुनि श्री 108 विशल्य सागर गुरुदेव ने अपनी पीयूष वाणी मे भक्तजनों से कहा कि सत्य जहां खिल जाता है, वहां भगवान मिल जाते हैं। सत्यमेव जयते जीवन में आचरण का विषय है। जीवन में सत्य की ही आवश्यकता है। सत्य ही ईश्वर है। सत्य हमारे हृदय में विराजमान है, उसे अंतरंग की अनुभूति से देखा जा सकता है। जहां क्रोध, मान, माया, लोभ होते हैं, वहां सत्य धर्म प्रकाशित नहीं होता है। विद्या का मंदिर वही है जहां नैतिकता, धार्मिकता का पाठ पढ़ाया जाता है। भगवान राम ने पिता के आदेश पर वनवास को सहर्ष स्वीकार कर लिया, यही सत्य है। सत्य की वचनबद्धता से तलवार भी फूलों की माला बन जाती है। सत्य कभी हारता नहीं है, परेशान अवश्य कुछ समय के लिए हो जाता है। व्यक्ति को हमेशा स्पष्टवादी होना चाहिए। सत्य की हमेशा परीक्षा होती है, उसे दबाया जाता है, परेशान किया जाता है परंतु अंत में विजय सत्य की ही होती है।
जैन मुनि श्री 108 विशल्य सागर गुरुदेव ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि शब्दों के जहर से ही महाभारत होता है, इसलिए वाणी में संयम और सत्यता हो तो व्यक्ति का जीवन महापुरुष के जीवन के समान बन जाता है। संपत्ति, संबंधी, सत्ता क्षणभंगुर है, यह शाश्वत नहीं है। स्वप्न को सत्य मानने वाला हमेशा दुखी होता है। जीवन में सम्यक ज्ञान का सूर्य उदय होना ही सत्य है। जिसने सत्य को समझा, उसी ने सत्य को पाया है। सत्य जीवन में आचरण और आराधना का विषय है।
प्रातः राजकीय अतिथि गुरुदेव विशल्य सागर जी के मुखारविंद से नया मंदिर जी में महा शांति धारा का पाठ किया गया। भगवान की शांति धारा का सौभाग्य सुशील राज, सुनील, सुमित छाबड़ा परिवार को मिला। बड़ा मंदिर जी में भगवान पार्श्वनाथ की शांति धारा का सौभाग्य सुरेश नरेंद्र सिद्धार्थ अरिहंत झाझंरी परिवार को मिला, मूल वेदी में शांति धारा और भगवान को बिहार का सौभाग्य जीतमल जी विजय विवेक छाबड़ा परिवार को मिला, नया मंदिर में दीप प्रज्वलन, शास्त्र भेंट, और गुरुदेव का चरण प्रक्षालन का सौभाग्य अपने जन्मदिवस पर शशि छाबड़ा और मीरा रानी छाबड़ा परिवार को मिला, भगवान पुष्पदंत नाथ का मोक्ष कल्याणक में लाडू चढ़ाने का सौभाग्य हनुमान नवीन प्रवीण पाटनी परिवार एवं जय कुमार आशीष अभिषेक गंगवाल परिवार को मिला। मंच संचालन कार्यक्रम के संयोजक सुरेंद्र काला ने किया। अलका दीदी, आरती दीदी ने बड़ा मंदिर में शांति धारा का पाठ किया। 3 सितम्बर को सांस्कृतिक कार्यक्रम परियोजना निर्देशक अंकिता सेठी, खुशी ठोल्या के द्वारा किया गया जिसमें विजेता पायल सेठी,चेताली पांड्या को प्राप्त हुआ। इनको पुरस्कृत दिल्ली के किशोर -आशा पांड्या द्वारा दिया गया। सभी प्रतियोगियों को समाज के मंत्री ललित सेठी ने सभी पुण्यार्जक और विजेताओं को बधाई दी। यह सभी जानकारी जैन समाज के मीडिया प्रभारी राजकुमार अजमेरा नवीन जैन ने दी है।
