शुचिता का विकास ही है उत्तम शौच धर्म

JAIN SANT NEWS जोबनेर

जोबनेर। आर्यिका रत्न 105 श्री नन्दीश्वरमति माताजी एवं आर्यिका 105 श्री विशेषमति माता जी के पावन सानिध्य में 1008 श्री बहत्तर जिन चैत्यालय बड़ा जैन मंदिरजी जोबनेर में भाद्रपद शुक्ला सप्तमी शनिवार को दशलक्षण महापर्व महामण्डल विधान पूजन में शौच धर्म की पूजा धूमधाम से की गई।

विधान मण्डल पूजा की बोलियों में शांतिधारा सौधर्म की बोली सुभाष कुमार अमित विनीत कुमार पाटनी परिवार द्वारा, महाआरती सम्मेद शिखर जी वंदना ग्रुप के माध्यम से लेडीज ग्रुप द्वारा मुनिसंघ कमेठी के तत्वावधान में की जाएगी। प्रथम कलश की बोली विनोद कुमार आयुष गंगवाल परिवार द्वारा ली गई। आर्यिका रत्न 105 श्री नन्दीश्वरमति माता जी एवं विशेषमति माताजी ने शौच धर्म के विशेषता समझाते हुए बताया कि आंतरिक शुचिता या निर्मलता का भाव ही शौच धर्म है। जीवन का शुद्ध होना और मन का भीगा होना, ये सब निर्मलता के मायने हैं। मलिनता का कोई कारण है तो वह है लोभ और लोभ के अभाव से ही हमारे जीवन में शुचिता आती है। मिक्की बड़जात्या ने बताया कि सुबह श्रीजी के अभिषेक एवं शांति धारा पश्चात विधान मंडल में शनिवार को उत्तम शौच धर्म की पूजा की गई। जिसमें महेश जैन, अजय जैन, मुनेश ठोलिया, विनोद ठोलिया और श्रावक-श्राविकाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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