कामा
सकल दिगंबर जैन समाज कामा के तत्वाधान में दस लक्षण महापर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म की विशेष पूजा आराधना आचार्य विनीत सागर महाराज,मुनि अजितसागर महाराज ससंघ सानिध्य एवं ब्रह्मचारिणी मणी दीदी के निर्देशन में की गई तो वही कोट ऊपर स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दसदिवसीय दशलक्षण महामंडल विधान का शुभारंभ हुआ।
जैन समाज के अध्यक्ष अनिल जैन लहसरिया के अनुसार दसलक्षण विधान के प्रथम दिन सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य भागचंद ,सुशील कुमार ,रिंकेश जैन बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ इस अवसर पर आचार्य विनीत सागर महाराज ने कहा की क्षमा मांगने वाले से क्षमा करने वाला कई गुना अधिक बड़ा होता है। क्षमा करने के लिए हृदय को विशाल और मन को निर्मल करना होता है। कहने में शब्द क्षमा बहुत ही सरल दृष्टिगोचर होता है लेकिन पालन करने में सबसे कठिन कार्य क्षमा ही है। आचार्य ने कहा कि यदि दस धर्मों में आपने जमा को अंगीकार कर लिया तो अन्य धर्म स्वतः ही धारण हो जाएंगे।
संस्कार का महत्व नाटिका का हुआ प्रस्तुति करण:
विजयमती त्यागी आश्रम में धर्म संस्कार शिक्षण पाठशाला के छोटे-छोटे छात्र छात्राओं ने शिक्षिकाओं के सहयोग से संस्कारों का महत्व नाटिका का मंचन कर यह संदेश दिया कि अभिभावकों द्वारा बचपन में दिए गए संस्कार ही कारगर होते हैं।
संस्कार देने की जिम्मेदारी अभिभावकों की ही है। दस धर्मो का सूक्ष्म विवेचन बच्चों द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन संजय जैन बड़जात्या व मनीषा जैन ने किया तो वही मध्यप्रदेश के आशीष जैन के भजनों पर श्रावक श्राविकाएं भक्ति में थिरकने लगे।
संकलंन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
