भो ज्ञानी !! जब तक जगत को समझते रहोगे तब तक आत्म धर्म में प्रवेश नहीं कर पाओगे।।
भो ज्ञानी !!धर्म समझने के लिए बहुत आवश्यकता है अपने आप को समझ लेना चाहिए।।
भो ज्ञानी !! भगवान बनने का धर्म है उसका नाम है उत्तम क्षमा धर्म है।।
वह तेरे ही भीतर है।।
भो ज्ञानी !! क्रोध करने से क्षण मात्र में प्रीति नष्ट हो जाती है।। देख लो घर घर में दीवाल खड़ी हो गयी क्रोध के कारण।।
जैसे हरे भरे वृक्ष में एक हींग की टुकड़ी रख दो वह विलीन हो जाएगा ऐसे ही घर में, परिवार में, मित्रों के बीच एक क्रोध की अग्नि डाल दो वह घर, परिवार मित्रता नाश हो जाएगी।।
।।क्रोध अनल है।।
पानी की बाहाव में कोई मर गया तो मुर्दा तो मिलेगा लेक़िन आग में तो मुर्दा भी नहीं मिलेगा।।ऐसे ही ज्ञानियों क्रोध की ज्वाला में राख भी नहीं मिलेगी।।
