वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने दीक्षा स्थली श्री महावीर जी में दी दो दीक्षाएं

JAIN SANT NEWS श्री महावीर जी

महावीर जी। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागरजी की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी वर्ष 2022 का वर्षायोग श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र में कर रहे है। इसी मौके पर सोमवार को 68 वर्षिय नरेन्द्र अखावत का नूतन नामकरण मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी और 60 वर्षिय शांता देवी का नूतन नामकरण 105 आर्यिका श्री प्रणत माताजी किया गया। नामकरण के पहले दीक्षार्थियों की शोभा यात्रा श्री वर्द्धमान सागर सभागार में पहुँची। यहाँ पर आचार्य श्री वर्द्धमान सागर चातुर्मास कमेटी और श्री महावीर जी महामस्तकाभिषेक समिति के संयुक्त तत्वाधान में दीक्षा समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

राजकुमार सेठी जयपुर अध्यक्ष, आचार्य श्री वर्द्धमान सागर वर्षायोग समिति ने बताया कि इस दौरान प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी का पूजन किय। पूजन अजय पंचोलिया सनावद ने सुंदर भजनों से कराया। सौभाग्यशाली परिवार की 5 महिलाओं ने चोक पूरण की क्रिया की। सथ ही दीक्षार्थी नरेंद्र और शांतादेवी ने आचार्य श्री से दीक्षा की याचना कर, आचार्य श्री व समस्त साधुओ, दीदी- भैया, श्रावक श्राविकाओं और समाजगण से क्षमा याचना की।

राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री को शास्त्र भेंट के पुण्यार्जक अखावत रहे। इस अवसर पर आचार्य श्री के प्रवचन का लाभ श्रावकों को मिला। इस बेला में आचार्य श्री के द्वारा दीक्षार्थी के पंच मुष्ठी केशलोच किए गए और दीक्षा संस्कार मस्तक व हाथों पर किए गए। इसके बाद आचार्य श्री ने नामकरण किया। पुण्यार्जक परिवार सज्जन, नितिन भुरावत उदयपुर की ओर से नूतन मुनि श्री जी को पिच्छी भेंट की तो सुशील, पारस जयपुर ने कमंडल भेंट किए। अनिल, कांतिलाल मेहता उदयपुर ने शास्त्र भेंट किए। इसी प्रकार दीक्षा के बाद नूतन नाम 105 प्रणत मति माताजी को पुण्यार्जक परिवार मुदित नरेंद्र अखावत परिवार की ओर से पिच्छी, श्याम कस्तूरचंद उदयपुर ने शास्त्र ,तरुण नरेंद्र ने कमंडल और कपड़े राजकुमार कस्तूरचंद उदयपुर ने भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन आर्यिका श्री महायशमती जी ने किया।

सोमवार को सुबह 5 बजे शांता देवी के केशलोचन हुए। केशलोच के समय सभी वैराग्यमयी पलों से द्रवित हुए। परिजनों के दोनों नेत्रों में एक नेत्र में खुशी के तो दूसरे नेत्र में दुख के आंसू थे। दीदीयो के भजनों से वातावरण वैराग्यमयी हो रहा था।

इस दौरान संघस्थ माताजी के अलावा आर्यिका105 श्री सरस्वतीमति माताजी, आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ने भी दीक्षार्थियों के केशलोचन किए। दोनो दीक्षार्थियों के मंगल स्नान के बाद दोनों ने भगवान का पंचामृत अभिषेक किया।

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