अपनी नजरो को इतना पवित्र कीजिये कि दूसरों को और अपने स्वयं को नजर लगें ही न सुधासागर जी
ललितपुर
क्षेत्रपाल मंदिर में प्रवचन सभा मण्डप में मुनि श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन सभा में भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब भी किसी अप्रत्याशित डर का भय सतावे तो मेरा नाम ले लेना। मैने भगवान से कह रखा हैं कि कोई भी भय मेरे होते हुए मेरे भक्तो को न हो, जैसे भक्ताम्बर में लिखा है कि हिरणी के सामने उसके बच्चे को कोई दुख पहुचाने का प्रयास करेगा वह दोनों के बीच मे पहाड़ बन कर खड़ी हो जाती हैं।
उन्होंने कहा मेरे शिविर के शिविरार्थियों से मेरा कहना है कि किसी भी डर से डरना नही, दुश्मन की बददुआ से घबराना नही, बुरी नजर से डरना मत, मेरा नाम लेना, मुझे याद करना, बस आपका कोई कुछ नही बिगाड़ पायेगा।
गुरुदेव ने कहा की जो लोग यह समझते हैं कि दुश्मनो के कहने से बर्बाद हो सकते हैं, मर सकते है, तो वे जान लेवे की दुश्मन की बददुआ से कभी विनाश होता नही होगा, और में तुम्हे इस बात का अभयदान भी देता हूं।
एक उदाहरण के साथ कहा की रास्ते मे चलते हुए ट्रको पर मैने कइयो बार देखा हैं कि पीछे लिखा होता हैं बुरी नजर वाले तेरा मुँह काला, अथवा फटा जूता टँगा होता हैं तो उसके परिणाम को समझने पर जाना कि तन्त्र विद्या भी सम्मान चाहती हैं, और जब उसे सम्मान नही मिलेगा तो वह उसी व्यक्ति का नाश कर देगी। जिसने उसका प्रयोग किया है ,,, तन्त्र कभी सामने से नही होता, गुप्त होता हैं।पीछे से ही वार करता हैं, इसलिये उससे डरना मत पलट कर देखना भी मत बस उसका अपमान ही करना है। और आपका काम हो गया वह आपका कुछ नही बिगाड़ पाएगी।
कोई वस्तु हैं तो देखने तक ठीक है बस ताकना नही चाहिये। ताकना ही नजरों का तंत्र हैं। बुरी नजर लगा सकती हैं इसलिये कहा हैं देखो दाखो तको मत, बोलो बालो बको मत, खाओ पीओ छको मत ,,,, अभी तक हम विचार कर रहें हैं दुसरो के द्वारा किये गए तन्त्र की लेकिन समस्या उससे नही उसका निवारण तो केवल इतने से ही हो जाएगा कि कह दो बुरी नजर वाले तेरा मुह काला समस्या तो यहां हैं जिसका निवारण तो मेरे पास भी नही हैं। वो हैं आपकी खुद की नजर।
गुरुदेव ने कहा की लोग शिखर जी जाते हैं, शांतिधारा कराते हैं, पूण्य की बहुत सारे कार्य करते हैं, लेकिन नजर खुद की लगी हो तो मेरा आशीर्वाद भी काम नही करेगा।
भगवान की पूजा फल भी नही बचा सकेगा, तब आप हमें पूजना छोड़ दोंगे, शांतिधारा को भी बुरा कहोगे। इसलिये महानुभाव अपनी नजर को पवित्र कीजिये
श्रीश जैन ललितपुर की कलम से
उद्बोधन के विषय मे श्रीश जैन ललितपुर ने कहा कि मित्रो मुझे तो गुरुदेव की भावना समझ मे आ गयी अब आपको भी समझने का प्रयास करना है कि अपनी नजरो को इतना पवित्र कीजिये कि दूसरों को और अपने स्वयं को नजर लगें ही न श्रीश जैन ललितपुर से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
