जैन संतों की साधना की कठिन परीक्षा है केश लोचन*:- आचार्य विनीत सागर महाराज स्वयं द्वारा अपने सिर,दाढ़ी मूछों के बालों को उखाड़ते देख भावुक हुए लोग

JAIN SANT NEWS कामा

जैन संतों की साधना की कठिन परीक्षा है केश लोचन*:- आचार्य विनीत सागर महाराज स्वयं द्वारा अपने सिर,दाढ़ी मूछों के बालों को उखाड़ते देख भावुक हुए लोग

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शरीर तो एक पुदगल है और पुदगल से जैन संत राग और ममत्व नहीं रखते हैं इसी कारण केश लोच की क्रिया की जाती है। शरीर से राग और ममत्व को समाप्त करने ,जीवो की सुरक्षार्थ, अहिंसा धर्म के पालनार्थ एवं स्वयं के संयम की साधना में वृद्धि हेतु जैन संतों के द्वारा केश लोचन किया जाता है। उक्त उद्गार कामा के विजय मती त्यागी आश्रम में आचार्य श्री विनीत सागर महाराज ने अपने शिष्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज के केशलोंच के अवसर पर व्यक्त किए।

आचार्य श्री ने कहा की जैन संतों की साधना की कठिन परीक्षा यदि कोई है तो वह केशलोंच ही है, दीक्षा से पूर्व भी पंच मुष्ठी केशलोंच किया जाता है। संयम की साधना में जैन संत को परिपक्व बनाने के लिए एवं तपस्या की कसौटी पर कसने की क्रिया केशलोंच ही है। आचार्य ने कहा की पंच इंद्रियों, दो हाथ दो पैर और एक मन पर नियंत्रण स्थापित कर उनका मुंडन किया जाता है। तो वही ग्यारहवाँ मुंडन केश लोंच होता है।

इस अवसर पर मुनि श्री अजित सागर महाराज ने कहा कि केशलोंच मुनियों के 28 मूलगुणों में से एक मूलगुण है। जिसे सभी जैन साधु साध्वियों के द्वारा पालन किया जाता है। तप त्याग और तपस्या कर आत्मकल्याण करना ही सन्तों का प्रमुख उद्देश्य होता है । वर्षायोग समिति के प्रचार प्रभारी संजय जैन बड़जात्या ने बताया कि केशलोंच में मुनि द्वारा स्वयं के सिर,दाढ़ी व मूछों के बालों को अपने हाथों से स्वयं द्वारा ही उखाड़ दिया जाता है।

स्वयं के शरीर के प्रति इतना परिषह कहीं ओर नही दिखाई देता है। इस अवसर पर मुनि को केशलोंच करते हुए देख उपस्थित लोग भावुक हो गए।

संजय जैन बड़जात्या कामां से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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