एक ऐसा संत जिसे पूरे कलकता ने देखा लेकिन उसने कलकता को नज़र उठाकर नहीं देखा विनम्रसागर जी

*☀विद्यागुरू समाचार☀* ⛳स्वर्णिम संस्मरण श्रृंखला⛳

एक ऐसा संत जिसे पूरे कलकता ने देखा लेकिन उसने कलकता को नज़र उठाकर नहीं देखा विनम्रसागर जी

जी या यह बात मुनि श्री विनम्रसागर महाराज ने आचार्य श्री विधासागर जी महाराज के कलकत्ता से जुडा एक संस्मरण को

मुनि श्री विनम्र सागर महाराज

सुनाते हुए श्रीमुख से कही  पूज्य मुनि श्री 108 विनम्रसागर महाराज अपने संस्मरण मे कहते है की आचार्य भगवन जब दीक्षित हुए थे तो उन्होने दीक्षा के 9 वर्ष तीर्थंकर जैसी चर्या की ऐसा लोग कहते है पूज्य मुनि श्री ने बताया किसी को देखना नहीं किसी से बात नहीं करना किसी से मिलना जुलना नहीं मात्र कुंदकुंद के अनुयायी होकर अंतर्मुखी जीवन जिया उन्होने कहा मुझे एक बात याद आती है जब गुरुदेव सन 1983 के आसपास कलकता गए और कलकता मे प्रवेश हो रहा था लोग पहले ही शिखरजी से एक माहोल सा बनमे लगा था आचार्य भगवन नगर मे पधारने वाले है तो कलकता के लोगो ने एक मीटिंग करी और गुरुदेव के पास आए और कहा गुरुदेव आप कलकता मत पधारिये क्योकी कलकता मे हिंसा है अलग तरह की विचारधारा है और वहा पर दिगम्बररत्व की इतनी पूजा भी नहीं होती है आचार्य श्री ने कुछ कहा नहीं अपना कमंडल उठाया और विहार कर दिया कोलकता मे हुगली नदी पर बना  हावड़ा ब्रिज कभी किसी के लिये बंद नहीं होता लेकिन इतिहास गवाह है लेकिन जब गुरुदेव उस ब्रिज से निकले तो वो ब्रिज दोनों तरफ से बंद कर दिया गया था शांति के साथ गुरुदेव संघ सहित कलकता नगर मे पहुचे युवा संघ था गुरुदेव भी युवा थे और संघ भी युवा था और लोगो की अलग अलग तरह की धारणाए थी आचार्य श्री कोलकाता से भ्रमण करते हुए उस जिनालय मे स्थापित हुए लोगो का कारवा अजेनो की भीड़ गुरुदेव के पीछे पीछे हो ली उस मनोहारी चमचमाती दिगंबर मुद्रा को देखने के लिये भीड़ लगातार लगी रही और बेलगछिया का जैन मंदिर जनता से ठसाठस भरा था और गुरुवर मूर्ति के साथ चम चमा रहे थे यह द्रश्य उस दिन तो बन गया दुसरे दिन अखबारों मे यह हेडलाइन छपी की एक ऐसा संत जिसे पूरे कलकता ने देखा लेकिन उसने कलकता को नज़र उठाकर नहीं देखा गुरुदेव अपनी इर्यापथ समिति के लिये आज भी जाने जाते है उनकी गर्दन कभी ऊपर नहीं उठती अपनी इर्यापथ समिति पर चलते हुए गुरुदेव जब कलकता नगरी मे प्रवेश कर रहे थे तो पूरी कलकता की नजरे गुरुवर पर थी लेकिन गुरुदेव मात्र चार हाथ आगे की ज़मीन को देखकर चले जा रहे थे और हर आदमी के मुह मे बस एक ही बात थी भगवान बस इन्ही को कहते है गुरुदेव की यह बात दिल को छु गयी उनकी इर्यापथ समिति के इस गुण को आप इस संस्मरण मे देखीये की बडे बडे गेजेटस मे बस एक मात्र बात छपी थी की एक ऐसा संत जिसे पूरे कलकता ने देखा लेकिन उसने कलकता को नज़र उठाकर नहीं देखा उनके इर्यापथ समिति के विशेष गुण को दिखाता है हमे भी और साधको को अच्छी शिक्षा लेनी चाहिए

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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