कर्म ही सबसे बड़ी अदालत व न्यायाधीश है सुधासागर महाराज
ललितपुर
सोमवार के सुधासाअनंगर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा की कर्म ही सबसे बड़ी अदालत और न्यायाधीश है जो अच्छे बुरे का निर्णय करता है।
बोलते हुए आगे कहा कई जन्मों के पुण्य का संचय भारत देश जन्मका परिणाम है उन्होंने कहा अगर हम अपना कर्म भूल गए तो कई जन्मों तक पछताना होगा। जिनपर उपकार है उनको कोसना नहीं वरन अच्छे कार्य करना ही जीवन में उत्थान का मार्ग है। साधु जीवन को श्रेयस्कर बताते हुए मुनि श्री ने कहा की साधु को प्राणी मात्र को बचाने की भावना रहती है। और उनकी साधना में असीम शक्ति का संचय होता है जिनका कोई नहीं उनका मैं हूं उनके बचाने का भाव श्रावक रखकर जहां अपना कल्याण करता है यही जीवन में सुख और असीम पुण्य का संचय करता है जीवन में गुरु संगति व अच्छे कर्मों को फल बताते हुए कहा की, वर्तमान में भारत जैसे देश और अच्छे कुल में जन्म लेने के उपरांत मानव को कोई ऐसे कार्य नहीं करना जिससे जीवन कलंकित हो, और पछताना पड़े।
संकलन अभिषेक जैन वाडिया रामगंज मंडी
