श्री शान्तिवीरशिवधर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः
महाव्रती साधु नवधा भक्ति पूर्वक आहार ग्रहण कर आत्मा का ध्यान करते है वह मोक्ष के अधिकारी है आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी
श्री महावीर जी
पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी संघ सहित श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र में विराजित है मंगलवार को नियमसार स्वाध्याय में समितियों के वर्णन में एषना समिती की चर्चा हुई । इसमें आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने बताया गया कि जो महा व्रती साधु विधिवत श्रावक के द्वारा नवधा भक्ति पूर्वक शुद्ध आहार ग्रहण करके अपनी आत्मा का ध्यान करता है वही मोक्ष का अधिकारी है। विवेचन में आचार्य श्री ने बताया कि नवधा भक्ति अंतर्गत पड़गाहन उच्च आसान चरण प्रक्षालन पूजन नमस्कार मन वचन काय की शुद्धि और भोजन शुद्धि इन नाम वाले नव प्रकार के पुण्यों से श्रावक श्राविकाएं नवधा भक्ति करते हैवात्सल्य वारिधि आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्रद्धा शक्ति उपलब्धता भक्ति विवेक दया और क्षमा इन नाम वाले सात गुणों सहित शुद्ध ओर योग्य आचार के पालन करने वाले श्रावक श्राविकाओं के द्वारा दिए गए आहार को ग्रहण करते हुए जो परम तपोधन रहते है।
उनके ऐषणा समिति होती है
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलनकर्ता अभिषेक लुहाड़िया
