जो आत्म हित करे वह श्रमण है आचार्य कनकनदी
भीलूड़ा
शांतिनाथ मंदिर में विराजित वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में बताया कि चींटी या अन्य कोई सूक्ष्मजीव अनजाने में मर जाने पर भी प्रायश्चित लेना चाहिए। उन्होनें कहा जो आत्म हित करे वह श्रमण है,एक उदाहरण से बताया की सांप काचली छोड़ देता है परंतु विष नहीं, ऐसे ही धर्म के नाम पर दिखावा, ढोंग पाखंड के लिए गुरु को अवश्य प्रायश्चित देना चाहिए। बाहु मुनि तथा दीपायन मुनी क्रोध के कारण अनंत संसारी बने।

आत्म श्रद्धा, आत्मज्ञान, आत्मचर्चा, आत्म गौरव से जो भ्रष्ट है वह अति भ्रष्ट है। जिनवाणी को नहीं मानने वाला भाव रहित द्रव्य रूप में दिखावा करने वाला अपनी आत्मा का ही घात करता है। अनंत केवलियों ने कहा है पुण्य और पाप बंध तथा मोक्ष परिणाम से होता है। भाव पाप करने वालों को गुरु अधिक दंडित करते हैं। प्रमाद सहित कोई आगम के प्रिय वचन बोले तो भी असत्य है,और गुरु प्रमाद रहित कठोर वचन बोले तो भी सत्य है। इस वेबिनार में आस्था श्री माताजी का प्रश्न था की बरसात होती है,कभी बड़ी बुंदे गिरती हैं,कभी मीडियम, कभी छोटी, हर तरह की बरसात की बूंदे कैसे हैं? बादलों में छेद होता है क्या? इस प्रश्न के समाधान में आचार्य श्री ने बताया की करुणायोग आधुनिक विज्ञान नहीं पड़ने के कारण ऐसी जिज्ञासा होना स्वाभाविक है। जैन धर्म के तत्वार्थ सूत्र की पंचम अध्याय में इसका समाधान है आधुनिक विज्ञान के फिजिक्स केमिस्ट्री से भी समझ सकते हैं कीबादल में छेद नहीं होता। बादल भौतिक वस्तु है। हर भौतिक वस्तु की तीन अवस्थाएं होती है solid liquid or gas तापमान कम होने पर पानी बर्फ बन जाता है। और तापमान अधिक होने पर पानी गैस रूप में परिवर्तित हो जाता है।सामान्य तापमान में लिक्विड रहता है। गर्मी में अधिक वाष्पीकरण के कारण स्कंध बंधता जाता है। अधिक वाष्पीकरण से मॉलिक्यूल पास पास में तथा कम वाष्पीकरण में परमाणु दूर दूर होते हैं। नदी तालाब से वाष्पीकरण आकाश में वापस जाने से परिस्थिति जन्य के पास पास आते हैं।जिस बादल में पानी ज्यादा होता है वह काला होता है। तथा उसमें और ओरूठन वास्को रहती है। जिस बादल में अधिक चल होता है उससे मूलाधार वर्षा होती है। तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव तथा पहाड़ व जंगल होने से रासायनिक प्रक्रिया से अधिक, वर्षा व कम वर्षा होती है।
विजयलक्ष्मी गोदावत से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
