परमात्मा का प्रकाश व्यक्ति के भीतर छुपे हुए सारे अवगुणों का नाश करके सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। अक्षयसागर महाराज
गुना
पूज्य मुनि श्री अक्षयसागर महाराज ने मांगलिक प्रवचन मे परमात्मा के विषय मे बताया उन्होने परमात्मा के प्रकाश का तेज सूर्य के प्रकाश से कई गुना अधिक बताया, आगे बोलते हुए कहा की सूर्य का प्रकाश तो केवल धरती को ही प्रकाशित करता है, लेकिन परमात्मा का प्रकाश तीनों लोको को प्रकाशमान करता है। इसके साथ ही परमात्मा का प्रकाश व्यक्ति के भीतर छुपे हुए सारे अवगुणों का नाश करके सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। शहर के चौधरी माेहल्ला में प्रवचन की बेला मे मुनि श्री ने कहा की प्रभु के समीप आते ही प्रभु के प्रकाश की शीतलता से व्यक्ति के कर्मों की निर्जरा होती है और इसके साथ ही व्यक्ति के ऊपर अमृत की वर्षा होती है एवं परमात्मा के प्रकाश की शीतलता पाकर सांसारिक कष्टों का नाश होता है। मुनिश्री ने कहा कि जिस तरह भूमि कितनी ही सूखी हो कठोर हो लेकिन अगर उस पर पानी की सतह पड़ जाए तो भूमि अपने आप सहज एवं शांत हो जाती है। उसी प्रकार प्रभु की शीतलता पाकर मनुष्य की सारी चिंताएं नष्ट होती हैं, उसे शांति का अनुभव होता है एवं व्यक्ति के जीवन से मोह रूपी अंधकार का नाश होता है। गुरुवर ने अपने संदेश में कहा कि कार्य के निष्पादन के बाद कारण की आवश्यकता नहीं होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार फसलों के लिए पानी की आवश्यकता होती है लेकिन फसल पक जाने के बाद यदि पानी आ जाए तो वह पानी फसल के लिए नुकसानदायक होता है और किसान की आंखों में भी वह पानी ला देता है। उन्होंने कहा कि कार्य के निष्पादन के बाद कारण का कोई महत्व नहीं रहता, उसकी कोई आवश्यकता नहीं होती। ज्ञान को समझने के लिए हमें परमात्मा की शरण में जाना ही पड़ता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी
