बिना सहजता, सौम्यता, समर्पण के प्रभु की भक्ति नहीं हो सकतीपहले पाप होता है फिर अपराध:विज्ञमती माताजी

JAIN SANT NEWS ग्वालियर

बिना सहजता, सौम्यता, समर्पण के प्रभु की भक्ति नहीं हो सकतीपहले पाप होता है फिर अपराध:विज्ञमती माताजी

गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार में बह रही ज्ञान की गंगा

ग्वालियर,

हम जो गलत कर्म करते हैं, वह जब तक हमारे मन में रहते हैं, तब तक पाप होते हैं। जब ये पाप शरीर में प्रकट हो जाते हैं तो वह अपराधी बन जाता है। सबसे पहले पाप होता है, फिर अपराध। अपराध होने की गारंटी नहीं होती, लेकिन पाप कर लिया तो पापियों की गिनती ज्यादा होती है, अपराधियों की कम। पापी का कभी कल्याण नहीं होता। यह उदगार ब्रह्म विद्या वाचस्पति पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने शुक्रवार को चम्पाबाग बगीची में गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार में व्यक्त किए।

माताजी ने कहा कि परिवार में जब लड़ाई होती है तो उसका असर बच्चों पर पड़ता है। माताजी ने बताया कि जिस भक्ति में सहजता, सौम्यता, समर्पण नहीं हो, वह भक्ति नहीं होती। वीतरागी के दरबार में कोई मालिक या नौकर नहीं होता। सब समान होते हैं। इसलिए प्रभु के दरबार में पुजारी बनकर जाना चाहिए। धर्म नौकर के माध्यम से नहीं होता, स्वयं करना पड़ता है। माता-पिता की सेवा नौकर नहीं कर सकते, स्वयं के करने से होती है।

गणधर वलय स्तोत्र जीवन का आधार

सेमिनार के दौरान गणधर देवों की आराधना कराते हुए माताजी ने बताया कि गणधर वलय स्तोत्र हमारे जीवन का आधार है। ये आपके जीवन को बदल सकता है। इसलिए इस स्तोत्र के माध्यम से गणधर देवों की आराधना करना चाहिए।

500 से अधिक प्रतिभागी 16 दिन तक धर्म-अध्यात्म की गंगा में गोते लगाएंगे

चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि इस सेमिनार में 500 से अधिक प्रतिभागी 16 दिन तक धर्म-अध्यात्म की गंगा में गोते लगाएंगे। प्रवचन सभा के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन अनिल शाह, माधवी शाह, निर्मल जैन मारसंस, विनोद पाटोदी ने किया।

इन्होंने श्रीफल अर्पित किए

इस अवसर पर चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक पुरुषोत्तम जैन, विनय कासलीवाल, अजीत वरैया, मनोज सेठी, सचिन जैन मुरार, विजय कासलीवाल, पंडित चंद्रप्रकाश चन्दर, प्रवीण गंगवाल, पंकज छाबड़ा, पंकज बाकलीवाल, संजय जैन बोने एवं ललित जैन भारती ने माताजी के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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