कोई भी चीज यदि चाहते हो उसको अनमोल कर दो मुनि श्री
ललितपुर
पूज्य निर्यापक श्रमण सुधासागर महाराज ने कहा कोई भी चीज यदि पाना चाहते हो तो उसको अनमोल कर दो। उन्होंने कहा तुम्हारे माता पिता की कीमत कितनी है अनमोल है, तुम्हारी खुद की कीमत कितनी है अनमोल है। उन्होंने कहा तुम परिणाम में शान्ति चाहते हो या नही।
शान्ति अनमोल है,क्या उसका मूल्य चुका पाओगे? उन्होंने कहा मैं एक छोटा सा सूत्र दे रहा हु यदि कोई भी चीज को यदि पाना है तो उसको अनमोल कर दो।उन्होंने ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा यदि तुम धर्म पाना चाहते हो तो धर्म को अनमोल कर दो। तुम चाहते हो की जब भी मेरा जन्म हो भारत देश में हो तो उन्होंने कहा भारत देश मे जन्म लेना है अच्छा है या बुरा तुम भारत में जन्म लेने के लिए क्या कीमत दे सकते हो? अनमोल है उन्होंने कहा एक विदेशी कंपनी आई कहा हम तुम्हारे बेटे को 50 लाख देगे हम उसे अमेरिका ले जाएंगे तब तुम क्या करोगे? भारत की कीमत 45 लाख में बिक गयी। जिस माँ ने तुम्हे जन्म दिया पढाया लिखाया तुमने तुम्हारी पढ़ाई अमेरिका चाइनाको दे दी।
उन्होंने कहा अगर सबसे ज्यादा nri यदि कही है तो चाइना में है। उन्होंने मार्मिक उदबोधन में कहा सबसे ज्यादा भारत के लोग भारत माता का अपमान करते है। क्योंकि संसार का ऐसा कोई देश नही जहां भारत के nri नही हो। उन्होनें कहा की हमारे देश के सारे दिमाग देखते देखते सब विदेश चले गए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा आज हमारे देश के बेटों दिमाग से विदेश मजबूत हो रहा है। आज हमारी देश की पुण्यवाणी से माँसाहारी देश मजबूत हो रहे है।
उन्होंने कहा जब बेटा बड़ा हो जाता है पैरों पर खड़ा होता है अपने माँ बाप को भूल जाता है। उन्होंने कहा मैं बहुत कड़वा सच बोल रहा हु 25 साल तक माता पिता ने बड़ा किया जब उनकी सेवा की बेटे ने उन्हें छोड़ दिया। माँ बाप ने तुम्हे बड़ा किया पढ़ाया लिखाया सब कुछ किया तुम्हारी गन्दगी तक साफ की।
25 साल बाद जब माता पिता की गन्दगी साफ करने का नंबर आया तो तुम उनसे अलग हो गए 25 साल तक उन्होंने तुम्हारे लिए क्या नही किया।
उन्होंने कहा पशु समान-जैसे पशु बड़ा होने पर अपने माता पिता को छोड़ देता है वैसे ही हम बड़े होने पर जब माता पिता को मेरी जरूरत थी।
में उन्हें छोड़कर चला गया ये बहुत बडा अभिशाप होगा माता पिता की गंदगी साफ करना अच्छा है रोड पर गंदगी साफ करने से। उन्होनें कहा मान जाओ मेरी बात जो अलग हो गए हो वो वापिस आ जाओ और जो विचार बना रहे हो वो विचार त्याग दे।
मैं तुम पर कोई उपकार नही कर रहा मैं मात्र उपदेशक हु क्योंकि तुमने जैन कुल में जन्म लिया।
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
