निवाई में हजारों श्रद्धालुओ के बीच हुई चातुर्मास मंगल कलश स्थापना। चातुर्मास आराधना का पर्व है संतो ओर श्रावको की आस्था का केन्द्र है- आर्यिका विज्ञा श्री

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निवाई में हजारों श्रद्धालुओ के बीच हुई चातुर्मास मंगल कलश स्थापना। चातुर्मास आराधना का पर्व है संतो ओर श्रावको की आस्था का केन्द्र है- आर्यिका विज्ञा श्री

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सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में रविवार को भारत गौरव आर्यिका विज्ञा श्री माताजी ससंघ का रजतमय चातुर्मास मंगल कलश स्थापना काय॔कृम बड़ी धूमधाम से आयोजित किया गया।चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता विमल जौला व राकेश संधी ने बताया कि सर्वप्रथम शांतिनाथ अग्रवाल मंदिर में भगवान की शांतिधारा के साथ कलशाभिषेक किया गया।इसके बाद बैंड-बाजे के साथ आर्यिका विज्ञा श्री माताजी को कार्यक्रम स्थल डोम पाण्डाल में लाया गया।जहां पर चातुर्मास मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ चित्र अनावरण विमल झिलाय व दीप-प्रज्वलित प्रेम चन्द गिन्दौडी द्वारा किया गया।मंगलाचरण विशुद्ध वर्धनी महिला मंडल णमोंकार महिला मंडल ने किया। इसके बाद बिचला मंदिर के नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी गई।कार्यक्रम में संगीतकार नरेन्द्र एन्ड पार्टी के मधुर संगीत पर आर्यिका विज्ञा श्री माताजी की भक्ति भाव से नाचते गाते हुए भक्तो ने अष्ट द्रव्यों से पूजन करते हुए अर्ध समर्पित किए। इस दौरान सुंदर भजनों व जयकारो से माहोल भक्ति मय हो गया। इसके बाद सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा आर्यिका श्री को श्री फल भेंट कर मंगल चातुर्मास कलश स्थापना के लिए निवेदन किया।

विमल जौंला व राकेश संघी ने बताया कि मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम में आचार्य शांति सागर जी के नाम का प्रथम मंगल कलश श्री मति नीरा जैन सुशील कुमार राहुल कुमार जैन आरामशीन ने स्थापित किया।

आचार्य विराग सागर जी महाराज के नाम का दुसरा मंगल कलश प्रेम चन्द रमेश चन्द जैन गिन्दौडी ने स्थापित किया।

आर्यिका विज्ञा श्री के नाम का तीसरा मंगल कलश सुरेश चन्द संजय कुमार सुनील कुमार जैन भाणजा ने स्थापित किया।इसके अलावा 28 रजतमय मंगल कलश और स्थापित किए गए।

विमल जौला व राकेश संघी ने बताया कि आर्यिका माताजी का पादप्रक्षालन करने का सोभाग्य श्रेष्ठी नेमी चन्द राजकुमार पाटनी किशनगढ को मिला। शास्त्र भेंट लाल चन्द अंकित कुमार जैन नगर फोर्ट ने किया।गुरु मां को वस्त्र भेंट सुरेन्द्र कुमार श्रेयांस कुमार जैन माधोराजपूरा ने किया।गुरु मां की मंगल आरती करने का सोभाग्य रतन लाल सुरेश चन्द नितिन कुमार छाबड़ा को मिला।

कार्यक्रम में जयपुर अजमेर किशनगढ चाकसू फुलेरा टोंक नगर बनेठा झिलाय बोली जहाजपूर रेनवाल वाटिका नेवटा मालपुरा सवाईमाधोपूर कोटा पीपलु नगर नैनवा बूँदी चौमू बीलवा फागी चकवाडा सोलापूर महाराष्ट्र सहित विभिन्न नगरों से हजारों भक्तो ने भाग लिया।

चातुर्मास मंगल कलश स्थापना के दौरान आर्यिका विज्ञा श्री माताजी ने कहा कि मंगल कलश एक स्मृति चिन्ह है।चातुर्मास एक अहिंसा का त्यौहार है।उन्होंने कहा कि यात्रा दो प्रकार की होती है।अंतरंग की व बाहरी यात्रा जैन धर्म के दिगम्बर संत चार महा तक बाहरी यात्रा बन्द कर देते है।एक जगह रहकर धर्म की आराधना करते है।उन्होंने कहा कि जो स्वयं को स्वयं से मिला दे उसे चातुर्मास कहते है। माताजी ने कहा कि मुझे एक ऐसा इन्जीनियर बता दो जो इन्सान को इन्सान से जोड दे। विज्ञा श्री माताजी ने कहा कि चातुर्मास एक पव॔ है जिसमें संत और श्रावक एक स्थान पर रहकर ईश्वर की आराधना करते हैं तप,ध्यान करते है चातुर्मास ही एक मात्र ऐसा पव॔ है जो श्रावको को संतो से जोड़ता है जिसमें आराधना करने से ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है जो अपनी श्रद्धा और आराधना से संभव है।यह पव॔ आराधना का महापव॔ है संतो और श्रावको की आस्था का केन्द्र है।

उन्होंने कहा कि चातुर्मास का पावन पव॔ धम॔ के संस्कारो का पव॔ है जिसमें प्रत्येक श्रावक गुरुओ का सान्निध्य प्राप्त कर संस्कारो को अपने मन में भरता है जिससे वह अपने आने वाली पीढ़ी को भी संस्कारित करता है।चातुर्मास ऐसा पव॔ है जिसमें सभी बड़े बुजुर्ग,महिला,पुरूष और बच्चे संतो का सान्निध्य प्राप्त करते है और धम॔ के माग॔ को प्रशस्त करते है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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