विश्व शान्ति की कामना के साथ हवन में आहुतियां दीं।श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन*53 मांडनों पर महा शांतिधारा की गई संसार के प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और दया का भाव रखो विज्ञमति: माताजी

JAIN SANT NEWS ग्वालियर

विश्व शान्ति की कामना के साथ हवन में आहुतियां दीं।श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन*53 मांडनों पर महा शांतिधारा की गई संसार के प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और दया का भाव रखो विज्ञमति: माताजी

ग्वालियर

आठ दिवसीय अष्टान्हिका महापर्व के दौरान सिद्धांत रत्न भारत गौरव गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमती माताजी ससंघ के सानिध्य में चम्पाबाग बगीची में आयोजित श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान का गुरुवार को विश्वशांति की कामना के साथ समापन हो गया।

प्रतिष्ठाचार्य प. डॉ. अभिषेक जैन दमोह ने भगवान जिनेन्द्रदेव का अभिषेक कराने के साथ विधान में शामिल इंद्र-इंद्राणियों से 53 मांडनों पर एकसाथ वृहद महा शांतिधारा कराई। इसके बाद सभी ने दुनिया में अमन-चैन की कामना के साथ विश्वशांति महायज्ञ किया। इसके साथ नित्यमय पूजन, सरस्वती पूजन, जिनवाणी पूजन, जिनवाणी स्थापना की क्रियाएं की गईं। तदुपरांत हवन में आहुतियां दी गईं।

प्रतिष्ठाचार्य को प्रज्ञा भूषण की उपाधि दी
जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि विधान के समापन पर प्रतिष्ठाचार्य एवं एकलव्य विश्वविद्यालय दमोह के प्रोफेसर तथा हिंदी विभागाध्यक्ष प. डॉ. अभिषेक जैन को सकल दिगंबर जैन समाज ग्वालियर ने “प्रज्ञा भूषण” की उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया। अभिनंदन पत्र का वाचन चातुर्मास समिति के मुख्य संयोजक पुरुषोत्तम जैन ने किया। साथ ही विधान में सहयोगी रहे पुजारी राजकुमार, राजेश कुमार, दिनेश, अजीत व अंशुल के अलावा विधान मुख्य सौधर्म इंद्र नरेंद्र कुमार जैन एटा परिवार का जैन मिलन, चातुर्मास कमेटी व चम्पाबाग मंदिर कमेटी ने और वीरेन्द्र कुमार विनोद कुमार मसाले वाला परिवार ग्वालियर का भी सम्मान किया गया। इस अवसर पर चातुर्मास कमेटी के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, विकास गंगवाल, बंटी कासलीवाल, मनोज सेठी, पंकज बाकलीवाल, प्रमोद टोंग्या, पंकज छावड़ा, सुरेंद्र जैन वैक्सीन सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

इस अवसर पर पूज्य गणिनी आर्यिका विज्ञमती माताजी ने कहा कि श्रद्धा भक्ति से किया गया विधान अनुष्ठान से हमारे जीवन में परिवर्तन आता है, और यह अनुष्ठान सम्पूर्ण विश्व में सुख शांति की भावना से किया जाए तो निश्चित ही अधिक फलित होता है! जैन दर्शन का आधार स्तम्भ अहिंसा है, हम संसार के प्रत्येक जीव के प्रति करुणा की भावना रखते हुए जीवन जीयेंगे तो सही मायने में अहिंसा का पालन कर सकेंगे! शारीरिक हिंसा के साथ भावों के द्वारा होने वाली हिंसा को रोकना होगा! किसी के प्रति अशुभ सोचने मात्र से भी हमारा हिंसा कर्म का बंध होता है!

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *