मां काली के मंदिर निर्माण हेतु कई करोड़ों का बड़ा पैकेज ,किंतु 7 जैन मंदिरों के निर्माण के लिए धेला भी नहीं

पावागढ़सिद्धक्षेत्र उदासीनता के चलते उपेक्षा का हो रहा शिकार
पावागढ़
गुजरात प्रांत के बड़ोदरा जिले में स्थापित पावागढ़ सिद्धक्षेत्र जो वर्तमान में जैन सिद्ध क्षेत्र के रूप में कम अपितु शक्ति पीठ के रूप में अधिक पूजा जा रहा है। संपूर्ण पहाड़ी पर पुरातत्व विभाग का कब्जा है और प्राचीन जैन मंदिरों की पर्याप्त भूमि होने के बाद भी निर्माण कार्य गजपंथा सिद्ध क्षेत्र कमेटी को नहीं करने दिया जा रहा है। और वही एक और जहां प्राचीन काली का मंदिर था उसके लिए राज्य सरकार द्वारा बहुत बड़े पैकेज की घोषणा कर वहां विशाल मंदिर का निर्माण कराया गया है।जिसका उद्घाटन 18 जून को देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा किया गया है।


जैन मंदिर पूर्णता जीर्ण हालत में पहुंच चुके हैं और एक मंदिर के निकट तो बड़ी मात्रा में कूड़ा भी डाला जा रहा है। अन्य तीन जैन मंदिरों का जो रोप वे के पीछे स्थित हैं का अलग से परिसर है। जहां यदि आप जाएंगे तो आपको ऐसा प्रतीत होगा कि हमारे जैन मंदिरों की बड़ी ही दुर्दशा की जा रही है। ना पुरातत्व विभाग स्वयं निर्माण करता है और ना ही सिद्ध क्षेत्र की कमेटी को निर्माण करने देता है।
9 जून को मैं संजय जैन बड़जात्या राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री जैन पत्रकार महासंघ परिवार सहित वहां के दर्शन किए तो जैन मंदिरों की दुर्दशा देखकर मन व्यथित हो गया।

जब लोगों से जानकारी हासिल की तो पता चला कि 18 जून को आदरणीय मोदी जी यहां पधार रहे हैं और उसी लिए बहुत तेजी के साथ निर्माण कार्य चल रहा है। काली मां का मंदिर भव्यता को प्राप्त हो रहा है लगभग सात मंजिला नए मंदिर का निर्माण किया गया है जिसका उद्घाटन भी आदरणीय मोदी जी के द्वारा किया जा रहा है

लेकिन उसी धरा पर जैन मंदिरों की यह स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि सरकार भी अब हमारी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है या फिर हम अपनी बात सरकार तक पहुचाने में सफल नही हो पा रहे हैं। सिद्ध क्षेत्र कमेटी भी शायद इस ओर प्रयासरत नही है। एक और बात यहां पर मैं आपको बताना चाहता हूं कि जो वर्तमान में रोप वे वहां पर लगा है उसकी जगह नए उड़न खटोला (रोपवे) का निर्माण भी चल रहा है जो सीधे ही काली मंदिर पर ले जाएगा और वही से वापस ले आएगा। इसका मतलब यह हुआ कि आगे आने वाले भविष्य में जैन समाज यदि उस पावागढ़ की पहाड़ी पर जाएगा तो अपने जिनालयों के दर्शन भी नहीं कर पाएगा क्योंकि उस रोपवे में बैठकर सीधा काली मंदिर पहुंचेगा और वहीं से रिटर्न हो जाएगा।
नवीन क्षेत्रों एवं जैन मंदिरों का निर्माण कार्य निर्बाध गति से चल रहा है जोकि होना भी चाहिए किंतु पुरातन संस्कृति का संरक्षण ,संवर्धन होना भी बहुत जरूरी है

वही हमारी पहचान है और उस पहचान को बनाए रखना हम सब का परम कर्तव्य ,दायित्व है सिद्ध क्षेत्र की समिति भी इस ओर ध्यान देकर यदि अपनी तरफ से पूरा प्रयास करें तो सफलता मिल सकती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
