आर्यिका रत्न दृढ़मति माताजी की संघस्थ 18 साधिकाओं ने निर्यापक श्रमण संभव साग़र महाराज संघ के किये दर्शन
खुरई
प्राचीन जैन मंदिर जी में विराजित निर्यापक श्रमण संभव सागर महाराज एवं समस्त संघ के दर्शन 18 साधिका बहनों ने किये।
18 साधिका यह रही है
संघ के दर्शनों का लाभ लेने खुरई नगर की ब्रह्मचारिणी हेमलता दीदी, अशोक शाकाहार की बहन ( बरेला) चंदा दीदी, ब्रह्मचारी नितिन भैया जी की मां, सुनीता जैन, राहुल बड़्डे की मां अनुसूईया आदि आई। इन बहनों ने जब साधिका बनने के अपने अपने संस्मरण सुनाए तो सभी भावुक हो उठे। वही इन साधिकाओं को मुनि श्री ने आनंदधाम के निर्माण में गति लाने हेतु मार्गदर्शन दिया।

इस अवसर पर प्राचीन जैन मंदिर के व्यवस्थापक जिनेंद्र गुरहा ने समस्त समाज की ओर से मुनि संघ से क्षमा याचना की। व वर्षायोग 2022 के लिए आनंदधाम कमेटी सहित समस्त नगर वासियों ने किए श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया।
वर्तमान का आनन्द वही ले सकता है जिसे भविष्य का डर नही मुनि श्री

पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभव सागर महाराज ने विशाल धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने वर्तमान और भविष्य पर ध्यान दिलाते हुए कहा जिसे भविष्य का डर नहीं होता वही वर्तमान का आनंद उठा सकता है। आगे कहा भविष्य और भूतकाल की चिंता किए बिना जो कुछ करना है उसे वर्तमान में ही करना चाहिए। समय रेत की तरह मुट्ठी से फिसलता जा रहा है, इसलिए उसका अच्छी तरह से सदुपयोग कर लेना चाहिए। जो समय चिंता में गया समझो कूड़ेदान में गया। जो समय चिंतन में गया समझो तिजोरी में गया। मुनि श्री ने कहा कि जीवन की महानता, उपयोग है, इसे किसी ऐसे अच्छे कार्यों पर व्यय करना, जो तुम्हारे जाने के बाद भी बने रहे।
आनंद धाम तीर्थ के विषय मे बोलते है मुनि श्री ने कहा वर्तमान समय में खुरई में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम आशीर्वाद से आनंदधाम का निर्माण हो रहा है, आप अपनी चंचला लक्ष्मी का सदुपयोग करें, वरना यदि समय निकल गया तो पछताते ही रह जाओगे। वैसे आचार्य श्री चाहे तो उनके मात्र दो भक्त ही बाहर से आकर आनंदधाम का संपूर्ण निर्माण कर सकते हैं, परंतु यह सौभाग्य खुरई वासियों को मिला है। इसका सदुपयोग कर लो नहीं तो बहुत पछताओगे। एक लोकोक्ति बताते हुए मुनि श्री ने कहा कि सुख जाने पर कूप से जल की आशा रखना, लुटे हुए धनिक से धन की याचना करना ही जैसा है। वर्षाकाल बीतने पर खेत में बोनी करना जैसा है। ये सब अवसर से चूक जाने वाले व्यक्तियों के खेद का संवर्धन करने वाले हैं। समय पालन जाग्रत, व्यवस्थित जीवन की कुंजी है। मुनि श्री ने कहा कि समय को संपत्ति में बदलने वाली घड़ी के दो कांटे हैं, पुरुषार्थ और प्रतिभा। पुरूषार्थ कांटा चौबीसों घंटे घूमता है और प्रतिभा का कांटा 8 पहर में एक बार। प्रतिभा परामर्श देती हैं और पुरुषार्थ वक्त पर पसीना बहाता है। दोनों मिलकर जीवन के प्रत्येक क्षण को स्वर्णमय बनाते हैं। जिसके पास यह घड़ी है फिर उस पुण्यशाली को संसार की किसी भी संपदा की जरूरत नहीं पड़ती। प्रत्येक अवसर का लाभ उठाओ। जीवन को सफल बनाओ।।
प्रवचन के पूर्व सागर से आई संपूर्ण साधिकाओं ने अष्ट-दृव्य से पूजन संपन्न की। इस अवसर पर आनंदधाम समिति के जिनेन्द्र गुरहा, धर्मेंद्र खड्डर, मुकेश कबाड़ी, विजय भैया, अशोक रोकड़या, सुनील सर, हेमचंद बजाज, अशोक शाकाहार सहित अनेक व्यक्तियों ने मुनि संघ को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
