वर्षों की आस पूर्ण हुई राजस्थान के वात्सल्य वारिधि का राजस्थान में वर्षों बाद भव्य मंगल प्रवेश
दो राज्यो के संयुक्त नगर में 19 जून को संभावित प्रवेश
रामगंजमडी

मध्यप्रदेश और राजस्थान के वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का मध्य प्रदेश और राजस्थान के संयुक्त नगर भवानी मंडी में भव्य मंगल प्रवेश 19 जून को संभावित है।
विवरण
पूज्य गुरुदेव का राजस्थान में मुनि दीक्षा एवम आचार्य पद हुआ था।

एक 19 वर्ष के युवा बाल ब्रह्मचारी श्री यशवंत जिनका लौकिक जन्म मध्य प्रदेश के सनावद में हुआ। किंतु श्री वर्धमान सागर जी के रूप में राजस्थान के श्री महावीर जी दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में मुनि दीक्षा के रूप में आपका धार्मिक पारमार्थिक जन्म हुआ। यही नहीं आपको आचार्य पद भी राजस्थान की धार्मिक नगरी पारसोला में मिला। और आचार्य पद का 25वां रजत कीर्ति महोत्सव भी राजस्थान के किशनगढ़ नगर को प्राप्त हुआ।इसलिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को राजस्थान का कहे तो कोई अतिशयोक्ति पूर्ण नहीं होगा।
अद्भुत संयोग अतिशय

आपक बता दे भवानीमंडी, देश के गिने-चुने शहरों में एक नगर जो आधा नगर मध्य प्रदेश में है और आधा नगर राजस्थान में है। इसलिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के संत वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का वर्षों बाद पुनः मध्य प्रदेश से राजस्थान के संयुक्त नगर भवानी मंडी में प्रवेश एक अतिशय या चमत्कार ही है।
राजस्थान के भक्त क्या कहते है
श्री व र ध मा न सा ग र
व वात्सल्य वारिधि वंदना है
र राजस्थान पधारो
ध धड़कता है दिल खुशी से
मा महावीर जी आगमन से
न ना अब नही सुनेंगे
सा संघ सहित पधारों
ग गमन कीजिए
र राजस्थान करे अरदास राजा हो आप श्रमणों के

श्री महावीर जी कमेटी द्वारा आमंत्रण
कुछ वर्षों पूर्व श्री बाहुबली भगवान का महा मस्तकाभिषेक कर्नाटक में संपन्न कराकर श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र राजस्थान में 24 वर्ष बाद भगवान महावीर स्वामी के महा मस्तकाभिषेक के लिए आपने कर्नाटक से विहार महाराष्ट्र मध्यप्रदेश होते हुए किया है।
श्री महावीरजी अतिशय क्षेत्र की प्रबंध कार्यकारिणी समिति द्वारा आपको बेलगाम कोथली मांगीतुंगी में आमंत्रण दिया गया।
24 वर्षो के बाद मूल प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक
श्री महावीर जी अतिशय क्षेत्र जहां 24 वर्षों के बाद मूलनायक श्री महावीर स्वामी की मूल प्रतिमा का महा मस्तकाभिषेक होगा, और इस महोत्सव का प्रमुख सानिध्य प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी के मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का रहेगा।
23वर्षो बाद श्री महावीर जी प्रवेश

उल्लेखनीय है कि 72 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की मुनि दीक्षा 1969 में 19 वर्ष की उम्र में श्री महावीरजी अतिशय क्षेत्र में हुई । 30 वर्षों के बाद सन् 1999 में श्री महावीरजी में आप आचार्य बनकर 9 जनवरी 1999 को संघ सहित पधारें।
अब वर्ष 2022 में होने वाले महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम हेतु श्री महावीर जी राजस्थान 23 वर्ष बाद पधारेंगे
चरणानुदास
राजेश पंचोलिया
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलन
अभिषेक लुहाड़िया रामगंजमंडी
