वागड़ गौरव पूज्यवर मुनि श्री चन्द्रगुप्त जी गुरुदेव का 40वा अवतरण दिवस-11जून 2022

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वागड़ गौरव पूज्यवर मुनि श्री चन्द्रगुप्त जी गुरुदेव का 40वा अवतरण दिवस-11जून 2022

आचार्यदेव श्री आदिसागर अंकलिकर परम्परा की नन्दी गुरु वंशावली के प्रज्ञायोगी *आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव* के प्रियाग्र व बहु प्रतिभाशाली सुशिष्य *

मुनि श्री चन्द्रगुप्त जी गुरुदेव का संक्षिप्त परिचय

राजस्थान के जनजाति बहुल डूंगरपुर जिले की पूण्यनगरी चितरी जहाँ शाह राजेन्द्र जी व उनकी धर्मपत्नी शकुंतला देवी का धर्म संस्कारो से परिपूर्ण परिवार है
इस पुण्यशाली दम्पत्ति के तीन सन्ताने हुई

बड़ा बेटा माता-पिता व समाज की सेवा कर रहा है तो उनसे छोटी बहन अलका दीदी आजीवन ब्रह्मा. व्रत के साथ श्री मद राजचन्द्र आध्यात्मिक साधना केंद्र कोबा में साधनाभ्यास रत है

इनमें सन 1983 में जन्मे सबसे छोटे महान भव्यात्मा सुपुत्र जिनका नाम परिजनों ने कपिल रखा।
जो बचपन से खेलकूद-शिक्षा,मस्ती व धार्मिक आयोजनों में सबसे अग्रणी रहते थे
सन 1999 में गाँव चितरी में आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव संसघ का वर्षायोग हुआ जिसमें नगर के समस्त युवा व बाल गोपालो पर जीवन पर्यंत व्यसनों से दूर रहकर सद आचरणों पर बढ़ने के संस्कार वृद्धिगत हुए तो इसमें ही चार बाल भव्यात्माओ (अलका,सन्ध्या,रागिनी व कपिल भैया) में धर्म की गहरी नीव का निर्माण हुआ

कुछ ही समय पश्चात निकटतम नगर रामसोर के पास नदी में नाव डूबने वाला भयंकर हादसा हुआ जिसमें रामसोर के अनेक युवाओ का निधन हो गया जिसमें दो तो कपिल भैया के अध्यापक ही थे।
इस घटना ने किशोर वयी कपिल भैया के अंतर्मन में संसार की असारता का गहन चिंतन शुरू कर दिया कि जो उनके प्रिय अध्यापक थे ,युवा थे ,वे अचनाक इस दुनिया से चले गए। निश्चित ही जीवन का कोई भरोसा नही
और भवभवान्तरो के बाद अहोभाग्य से मिलने वाले इस श्रावक कुल से आत्मकल्याण करने के उद्देश्य से वैराग्य दृढ़ हो गया।

सन 2003 नगर में उपाध्याय श्री मनोज्ञसागर जी गुरुदेव का आगमन हुआ जिनकी निश्रा में आप चारो भव्यात्माओ ने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया।
और परिवार की आज्ञा से आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव के ससंघ में अध्ययन हेतु चले गए।
जहाँ निरन्तर अभ्यास के पश्चात ब्रह्म. कपिल भैया को महाराष्ट्र की फलटण नगरी में आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव ने *6 oct 2003 को क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की*, नाम पूज्य हुआ *क्षुल्लक श्री सुलभगुप्त जी*

फिर गुरु चरणों निरन्तर विकास के पश्चात आपने तीन लोक में सबसे पूज्य व श्रेष्ठ मुनि पद पाने का निवेदन किया

जिस पर *उत्तरप्रदेश की बाराबंकी शहर में हजारो श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूज्य आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी गुरुदेव ने 13 फरवरी 2009 को क्षुल्लक जी को मुनि दीक्षा प्रदान* की,

*जग विख्यात नाम हुआ मुनि श्री चन्द्रगुप्त जी गुरुदेव*

आपने विलक्षण रचनात्मक सोच व ज्ञान से अनेक विधान,स्तोत्र,चालीसा,आचार्यो की भक्ति सरिताओ की रचना की है व उनको अपने मधुर कण्ठ से गाया भी है।

जिसकी स्वर लहरी घर घर मे गूँजती है।

आपके दिव्य कण्ठ से होने वाली भक्ति सरिता से श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाता है
वर्तमान में आप अपने *अग्रज मुनि श्री सुयशगुप्त जी गुरुदेव* के संघ दादा गुरु *वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरुराज* को आदर्श मानकर उनसे प्रेरित होकर निरन्तर *स्वाध्याय व अध्ययन* में रत रहते है।

ध्यान व ज्ञान परमतप को केंद्र में रखते हुए आप अपनी गुरु परम्परा का सतत गौरव बढा रहे है।

निश्चित ही आप 21वी सदी में जैन दर्शन का असीम गौरव बढा रहे है

*ऐसे पूज्यवर नगर गौरव मुनि श्री चन्द्रगुप्त जी गुरुदेव के 40 वे अवतरण दिवस पर उनके श्री चरणों मे कोटिशः नमन*

 शब्दसुमन-शाह मधोक जैन चितरी

नमनकर्ता-श्री चन्द्रप्रभु जैन युवा संगठन चितरी

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