समवसरण विधान में उमड़ रहा आस्था का सैलाब
दलपतपुर
आर्यिका रत्न चिंतनमति माताजी, आर्यिका श्री साकारमति माताजी,शांतमति माताजी, धुवृमति माताजी श्रुतमति माताजी के मंगल सानिध्य एवं वास्तुविद विधानाचार्य ब्रह्मचारी निलेश भैया बंडा, पंडित अजय शास्त्री, पंडित कमलेश शास्त्री के मार्गदर्शन में 1008 समवसरण महामंडल विधान का शुभारंभ 5जून से हुआ, जो 9जून रविवार तक चलेगा। बड़े मंदिर पारसनाथ जिनालय दलपतपुर मे आयोजित समवसरण महामंडल विधान में नगर गौरव समाधिस्थ मुनि श्री सुमतिसागर महाराज के परिवारजन,व ब्रह्मचारिणी चंपा दीदी, ब्रह्मचारिणी वर्षा दीदी, ब्रह्मचारिणी ऋतु दीदी, ब्रह्मचारिणी सपना दीदी, एवं ब्रह्मचारिणी अंकिता दीदी का मंगल सानिध्य प्राप्त हो रहा है।
जानकारी देते हुए अशोक शाकाहार ने बताया कि विधान के शुभारंभ पर प्रातः 6:00 बजे मंगलाष्टक, विनय पाठ, नित्य पूजा पीठिका एवं नव देवता पूजा की आराधना प्रारंभ हो जाती है। इसके उपरांत प्रातः 8:30 आर्यिका संघ के सानिध्य में समवसरण विधान का शुभारंभ होता है। जिसमें प्रतिदिन दलपतपुर सहित आसपास के गांव से श्रद्धालु पहुंचकर असीम धर्म लाभ ले रहे हैं। विधान में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है।
निस्वार्थ भाव से करें धर्म आराधना-चिंतन मति माताजी

दलपतपुर- बड़े मंदिर पारसनाथ जिनालय में विराजमान आर्यिका रत्न चिंतन मति माताजी ने विधान के द्वितीय दिवस पर विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि- व्यक्ति को हमेशा कोई भी धर्म का कार्य निस्वार्थ भाव से ही करना चाहिए। जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से धर्म करता है, वह उतना ही भगवान के समीप होता है। इसके विपरीत जो व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए, अपने भले के लिए धर्म करता है, वह उतना ही भगवान से दूर रहता है। आर्यिका श्री ने कहा कि निष्काम सेवा शांत मन वाले व्यक्ति के द्वारा ही हो सकती है। चंचल मन वाला तो लौकिक कामना से ही सेवा करता है, जिसमें अहम भाव निहित होता है। जो कर्म कामनाओं से प्रेरित होकर किया जाता है वह धार्मिक कर्म नहीं माना जाता। कामना सहित किया गया कर्म चिंता पैदा करता है।
आर्यिका श्री ने कहा कि जिसके हृदय में निष्काम भक्ति का जन्म हो जाता है, वह अपने आप में जीवन के परमसुख से जुड़ जाता है। भक्ति में बाहरी व्यवस्था की नहीं भीतरी भावना, आस्था की आवश्यकता होती है। वास्तव में भक्ति ह्रदय का वह भाव है जो मनुष्य को संसार की धारा से उठाकर परम सत्ता से संपर्क स्थापित कराता है। आर्यिका श्री के प्रवचन के पूर्व बाहर से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र का अनावरण किया। ज्ञान दीप का प्रज्ज्वलन पाठशाला की बहनों एवं अशोक ‘शाकाहार’ ने किया। प्रवचन सभा का संचालन ब्रह्मचारी वास्तु विद नीलेश भैया बंडा एवं पंडित अजय शास्त्री, पंडित कमलेश शास्त्री ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
