जिनवाणी नंदन आचार्य कनक नंदी संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व धूमधाम से मनाया गया ।

JAIN SANT NEWS गलियाकोट

जिनवाणी नंदन आचार्य कनक नंदी संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व धूमधाम से मनाया गया ।

गलियाकोट

जिनवाणी नंदन आचार्य कनक नंदी संघ के सानिध्य में श्रुत पंचमी पर्व धूमधाम से मनाया गया । इस अभूतपूर्व बेला में सभी महिलाए जिनवाणी को मस्तक पर धारण करके 2_2 के जोड़ों से जुलूस में अग्रणी पंक्ति में चल रही थी । उसके बाद आचार्य श्री कनक नंदी मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी मुनि श्री अध्यात्मनंदी सुवत्सलमति माताजी,क्षु सुविक्षमति ,क्षु भक्ति श्री, इसके बाद श्रावक श्राविका मंगल गीत गाती हुई वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक गुरुदेव की जय, द्वादशांग जिनवाणी माता की जय, अनेकांतमय अहिंसा धर्म की जय आदि जयकारों के साथ जुलूस स्वाध्याय भवन में आया । सभी महिलाओं ने जिनवाणी को मस्तक पर धारण करके गरबा नृत्य किया । सुविज्ञ सागर जी गुरुदेव ने श्रुत पंचमी के महत्व की दो कविताएं प्रस्तुत की जिस पर महिलाओं तथा पुरुषों ने गरबा नृत्य किया । नंदौर से जिग्नेश भाई ने अपना रथ लाकर जुलूस की शोभा में चार चांद लगा दिए । नंदौर से भी सपरिवार सभी लोग आए थे । यहां के गांव के भी सभी लोग ब्रह्मचारी सोहन लाल जी ब्रह्मचारी खुशपाल जी मुनि सेवा संघ के अध्यक्ष दिनेश सुमति विलास सुरेंद्र राजेंद्र मनीष कमल दिलीप शांतिलाल अमित अभिषेक निधिप वर्ण संदीप मासूम अंजना सविता खुशबू ममता मंजुला मधु चंदा जीना मनीषा चेतना पुष्पा हिना विमला दीपिका रमीला मीना टीना रेणुका आदि थे सुबह 6:00 बजे श्रुत स्कंध विधान अंजना अशोक कुमार जी पीठ वालों की तरफ से था । भगवान का अभिषेक किया गया। आचार्य श्री कनक नंदी गुरुदेव का पाद प्रक्षालन आदि से किया गया । समाज के सभी लोगों ने पाद प्रक्षालन का लाभ लिया। साथ ही आचार्य श्री द्वारा रचित जिनवाणी की पूजा की गई।

वही नंदौर से आई तन्मयी ने नृत्य किया । जिनवाणी की आरती” मैं
तो आरती उतारू रे जिनवाणी माता की जय जय जिनवाणी माता जय जय हो जय जय” सभी ने नृत्य किया । ब्रह्मचारी सोहन लाल जी ने श्रुत पंचमी के अवसर पर सभी दानदाताओं की अनुमोदना करके धन्यवाद दीया । उन्होंने बताया कि आज के दिन जिनवाणी प्रकाशन मैं सहयोगी अवश्य बनना चाहिए जिससे हमें भी केवल ज्ञान प्राप्त हो ।

आज से कॉलोनी का नाम आध्यात्मिक क्रांति शांति” का केंद्र रहेगा ।

आचार्य श्री कनक नंदी गुरुदेव ने सभी कॉलोनी वासियों को आशीर्वाद देते हुए बताया कि आज से कॉलोनी का नाम “आध्यात्मिक क्रांति शांति” का केंद्र रहेगा । 30 माह तक सभी कॉलोनी वासियों ने गुरु सेवा करके महान पुण्य अर्जन किया हैं। गुरु निरंतर ध्यान, अध्ययन, स्वाध्याय जिनवाणी के माध्यम से करते हैं। मुनिराज तथा भगवान की मूर्ति जिनवाणी पढ़कर ही बनते हैं। अतः आप सभी ने गुरु के माध्यम से जिनवाणी की भी सेवा की है। जिससे जिनवाणी सारे विश्व में जैन धर्म का डंका बजा रही है। कॉलोनी वासी 30 माह से रोज श्रुत पंचमी पर्व मना रहे हैं। जिनवाणी की सेवा साक्षात तीर्थंकर की पूजा है। जिनवाणी के माध्यम से ही गुरु मूर्ति की प्रतिष्ठा तथा स्वयं की आत्मा का ज्ञान प्राप्त करते हैं। आत्म कल्याण का मार्ग इससे प्रशस्त होता है। जिनवाणी मां महा उपकारी है तथा उसका रहस्य तथा अर्थ बताने वाले गुरु भी हमारे लिए बहुत उपकारी हैं। जिनवाणी को समझना सामान्य लोगों के लिए आसान नहीं है। आत्म ध्यानी ज्ञानी साधु ही हमें समझा सकते हैं। गुरुदेव ने बताया कि महावीर भगवान के शिष्य गौतम गणधर उनके शिष्य के शिष्य आचार्य धर सेनाचार्य को आभास हुआ कि अभी के शिष्य प्राज्ञ नहीं है। उन्हें पूर्ण रूप से याद नहीं रहता है। अतः जिनवाणी को लिपिबद्ध करना चाहिए। अतः उन्होंने दक्षिण भारत से दो शिष्य भूतबली तथा पुष्पदंत को बुलाकर के उनकी परीक्षा ली। एक शिष्य को मंत्र में एक अक्षर कम करके दिया तथा दूसरे शिष्य को एक अक्षर अधिक कर के मंत्र सिद्धि करने के लिए कहा । जिस शिष्य को कम अक्षर दिया था उसको एक आंख से कानी देवी प्रकट हुई तथा दूसरे शिष्य को दांत बाहर तथा अधिक वाली देवी प्रकट हुई दोनों शिष्यों ने अपनी प्रज्ञा से मंत्र को सुधार कर फिर से आराधना प्रारंभ की । जिससे सुंदर देवियां प्रकट हुई ।

धरसेन आचार्य ने ज्ञात कर लिया की दोनों शिष्य अपने मन से कुछ भी शास्त्र में अधिक या कम नहीं लिखेंगे दोनों को षट्खण्डागम
ग्रंथ लिखने का आदेश दिया । आज के दिन सर्वप्रथम ग्रंथ की रचना पूर्ण हुई थी । धरसेनाचार्य ने स्वयं श्रावको को कह कर के रथ यात्रा जुलूस निकाल कर श्रुत पंचमी पर्व मनाया । अतः गुरुदेव भी आगम के अनुसार अन्य कोई पर्व नहीं मनाते हुए भी श्रुत पंचमी पर्व धूमधाम से मनाते हैं,। विजयलक्ष्मी गोदावत से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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