वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का धार में हुआ मंगल प्रवेश

JAIN SANT NEWS धार

वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी का धार में हुआ मंगल प्रवेश

धार
आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ने
कहा धार नगर में काफी वर्षो पूर्व घटना घटी थी, इस पृथ्वी पर ही श्री ऋषभदेव श्री आदिनाथ भगवान के नाम पर श्री भक्ताम्बर स्तवन लिखा गया। भगवान की भक्ति की गई है। जिन शासन और जैन धर्म की प्रभावना आचार्य श्री मानतुंगा चार्य द्वारा की गई। इसका आपको गौरव होना चाहिए

उन्होनें कहा आज 1008 श्री शांतिनाथ भगवान के जिनालय के दर्शन कर प्रसन्नता हुई। धार नगर प्रवेश उपरान्त धर्म सभा मे आचार्य श्री ने यह उद्गार व्यक्त किये।

आचार्य श्री ने आगे बताया कि श्री आदिनाथ भगवान ने जन सामान्य के लिए असि मसि और कृषि का ज्ञान दिया।

इसके पूर्व संघस्थ शिष्य मुनि श्री हितेन्द्र सागर महाराज के मंगल प्रवचन हुए। उन्होंने जिनालय के दर्शन के बाद भोजशाला का निरीक्षण भी किया। नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए आचार्य संघ को अतिशय क्षेत्र श्री मानतुंगगिरी लाया गया।

जहाँ आचार्य आचार्य श्री की आगवानी आचार्य श्री भरत सागर जी के शिष्य आचार्य श्री सुव्रतसागर जी महाराज एवम क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारियों ने एवम वात्सल्य वारिधि ग्रन्थ के लेखक श्री विनोद हर्ष अहमदाबाद ने श्री नरेश गंगवाल,श्री किशोर, श्री मौसम श्री योगेंद्र एवम अन्य विभिन्न सामाजिक संगठनों ने की।

प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी दक्षिण की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टा धीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर महाराज का संघ सहित मंगल विहार कर्नाटक से राजस्थान की और पद विहार करते हुए धार नगर एवम श्री मानतुंगगिरी आतिशय क्षेत्र पर 9 मुनिराज, 15 आर्यिका माताजी, तथा दो क्षुल्लको सहित 27 साधुओ का प्रवेश हुआ।
श्री विनय छाबड़ा, तथा श्री आशीष जैन ने बताया कि नगर आगमन पर समाज जन ने बाजे गाजे के साथ नगर की गरिमा अनुरूप आगवानी की व
आचार्य श्री का चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती की। इस अवसर पर समाजजन ने बहुत ही श्रद्धा भक्ति के साथ आचार्य श्री संघ की आगवानी के लिए विशेष तैयारी कर घर घर पर रगोली बनाई। व चरण प्रक्षालन कर आरती की।

एक विवरण मानतुंगगिरी क्षेत्र का
श्री मानतुंगगिरी का विकास
गुजरात केसरी आचार्य श्री भरत सागर जी ने राजा भोज की नगरी धार में श्री मान तुंग गिरी का विकास करवाया ।

गुरुदेव के समाधिस्थ होने पर
आचार्य श्री भरत सागर महाराज की शिष्या क्षुल्लिका 105 श्री चंद्रमति माताजी के मार्ग दर्शन में चल रहा है।

जैन समाज बहुत ही उत्साहित एवम आनंदित है कि, उन्हें भारत वर्ष के महानतम आचार्य श्री के दर्शन का लाभ मिल रहा है
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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