पाप – पुण्य का अपना अपना खेल

JAIN SANT NEWS गोठडा

पाप – पुण्य का अपना अपना खेल : आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

गोठडा

प. पू. भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न विज्ञाश्री माताजी ससंघ नैनवां की तरफ विहार करते हुए जन – जन को अपनी अमृतमयी वाणी का पान कराते हुए बढ़ रही है। आर्यिका श्री का आज गोठड़ा में गाजे बाजे के साथ मंगल प्रवेश हुआ, वहां उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए माताजी ने श्रृद्धालुओं को कहा कि – हमेशा अच्छे करते रहिये क्योकि हम जैसा करेंगे उसका वही फल हमें प्राप्त होगा ,एक बार देवर्षि नारद वैकुण्ठ धाम गए और श्रीहरि से कहा, ‘प्रभु, पृथ्वी पर आपका प्रभाव कम हो रहा हैं धर्म पर चलने वालों को कोई अच्छा फल नहीं मिल रहा, जो पाप कर रहे हैं उनका भला हो रहा हैं। भगवान ने कहा, ‘कोई ऐसी घटना बताओ,नारद ने कहा- अभी मैं जंगल से आ रहा हूं, वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। एक चोर उधर से गुजरा, पर गाय को देखकर भी नहीं रुका वह उस पर पैर रखकर दलदल लांघकर निकल गया आगे जाकर चोर को सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिली। वहां से एक वृद्ध साधु गुजरा उसने गाय को बचा लिया।मैंने देखा कि गाय को दलदल से निकालने के बाद वह साधु एक गड्डे में गिर गया। प्रभु, ‘बताईए यह कौन सा न्याय हैं? नारद की बात सुनने के बाद प्रभु बोले, ‘यह सही ही हुआ जो चोर गाय पर पैर रखकर भागा था, उसकी किस्मत में तो खजाना था लेकिन इसके कारण उसे केवल कुछ मोहरें ही मिली वहीं, उस साधु को गड्डे में इसलिए गिरना पड़ा क्यूंकि उसके भाग्य में मृत्यु लिखी थी लेकिन गाय के बचाने के कारण उसके पुण्य बढ़ गए और उसकी मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल गई। जब इतनी सी सेवा और पुण्य कार्य करने से मौत तक टल सकती है तो प्रभु की सेवा का कितना अचिन्त्य फल होगा । आप जीवन मे धर्म कार्य करते रहे इसी से हमारे स्वर्ग और नरक का द्वार तय होगा आज की आहारचर्या गोठड़ा में हुई।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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