दूसरो की निंदा करने से बचें -ब्र.संदीप भैया

JAIN SANT NEWS बीना

दूसरो की निंदा करने से बचें -ब्र.संदीप भैया

बीना

सोमवार को शांतिनाथ जिनालयमें शिविर के द्वितीय दिवस पर सैकड़ों शिविरार्थियों को विभिन्न कक्षाओं में संस्कृत दर्शन पाठ,सरस्वती पाठ स्त्रोत, महावीराष्टक, शांतिनाथ स्तवन, सुप्रभात स्त्रोत, निर्वाण कांड आदि का प्राकृत भाषा एवं संस्कृत भाषा में बाहर से आए विद्बानो एवं ब्रह्मचारी भैया के द्वारा अध्ययन कराया गया।

जानकारी देते हुए अशोक शाकाहार ने बताया की 6 वर्ष से 60 वर्ष तक के शिविरार्थियो ने शिरक़त कर अपूर्व ज्ञानार्जन किया। शिविर में मंगलाचरण श्रीमती रजनी शाह ने संस्कृत भाषा में किया। आचार्यश्री विद्या सागर जी महाराज एवं मुनि श्री सरल सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन करने का सौभाग्य प्रो. अरुण प्रकाश बुखारिया , राकेश वर्धमान एवं अशोक शाकाहार को प्राप्त हुआ। माँ जिनवाणी की स्थापना करने का परम सौभाग्य बीना,सिरोंज, अशोकनगर, टीकमगढ़ , खुरई , सागर , जबलपुर , भोपाल आदि स्थानों से आये हुए बाल शिविरार्थियों को प्राप्त हुआ।

-शांतिनाथ जिनालय में आयोजित अष्टदिवसीय शिविर के द्बतीय दिवस सोमवार को सैकड़ों शिविराथीयो को संबोधित करते हुए ब्र संदीप भैयाजी ने कहा प्राकृत भाषा मे “निर्वाण कांड ” जो कि आचार्य कुंद कुंद महाराज द्वारा अब से लगभग 2000 वर्ष पूर्व लिखा गया, जिस क्षेत्र या स्थान से तीर्थंकर भगवानों ने मुक्ति पाई है, उस क्षेत्र या भूमि को सिद्धक्षेत्र कहा जाता है । निर्वाण कांड में 24 तीर्थंकरों के अलावा अन्य मुनिराजों ने जहाँ – जहाँ से निर्वाण प्राप्त किया है उन स्थानों की वंदना करने से सिद्धात्माओं की वंदना तो होती ही है, साथ ही निर्वाण भूमि की भी आराधना हो जाती है। इससे सातिशय पुण्य का संचय होता है।

भैया जी ने आगे बताया कि स्वयं को सुधारे बिना औरों को सुधारने की बात करना बेमानी है। वह कुछ इस तरह है कि जैसे बिना बीज के फसल उगाना। जिस व्यक्ति की प्रकृति और प्रवृत्ति आपको पसंद ना हो उसकी उपेक्षा कर दूर रहना ही ठीक है, किंतु दूसरों के आगे उसकी निंदा नहीं करना यह सज्जनता की निशानी है। छोटा बालक तो केवल हमारी नींद बिगाड़ता है, परंतु बड़ा बालक तो हमारी जिंदगी ही बिगाड़ देता है। जो खिलाकर खाता है वह हमेशा ही खिलखिलाता है। सफर में जितना बोझ कम उतना ही व्यक्ति सुखी रहता है। जीवन में जितना परिग्रह कम उतना ही मानव सुखी रहता है। हम जैसा सोचेंगे वैसा हो जाएगा, इसलिए वैसा सोचो जैसा हमें होना है। तिजोरी में से कोई धन चुरा सकता है। हाथ में से कोई लक्ष्मी ले सकता है। किंतु भाग्य में से ले जाने की ताकत किसी की भी नहीं है।

भैया जी ने कहा कि शादी एक ऐसा ‘जादुई कुआ’ है कि अंदर गिर चुके लोग इसमें से बाहर निकलने को तरसते हैं, और जो बाहर है अंदर गिरने को तरसते हैं। गम से घबराया ना करो, मित्रो गुलाब कांटो के बीच में भी मुस्कुराता है। इंसान का हृदय चौड़ा हो जाए, तो वह मर जाता है और यदि विशाल हो जाए तो कई समस्याओं का नाश हो जाता है। अहंकार हथोड़ा है और विनम्रता चाबी। हथौड़े से ताला टूटता है, जब की चाबी से ताला खुलता है। चाबी बनने का प्रयास करें, हथोड़ा बनने का नहीं।

संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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