आचार्य श्री ने चन्द्रप्रभ साग़र महाराज के लिए कहा अद्वितीय साधक को देख मेरा मन प्रफुल्लित हो जाता है
रहली
एक शिष्य के लिए कितना गौरव व् हर्ष कर देने वाला क्षण होता होगा जब गुरु ही शिष्य का गुणानुवाद करता है जी हां यह क्षण था जब रहली की धरा पर पूज्य आचार्य भगवन विद्यासागर महाराज की निश्रा मे चतुर्थ कालीन चर्या धारी निर्मोही साधक चन्द्रप्रभ सागर महाराज का दीक्षा महोत्सव मनाया गया इस अभूतपूर्व क्षणों मे आचार्य श्री ने अपने शिष्य का गुणानुवाद किया जो सभी को भाव विहल कर देता है जो सचमुच एक अभूतपूर्व है जो इतिहास मे अविस्मर्णीय व चिरकालिक रहेगा हमने हम अब तक शिष्य को गुरु गुणानुवाद करते देखा लेकिन गुरु स्वयम शिष्य का गुणानुवाद कर रहा ही यु ही आचार्य श्री महानतम नहीं कहे जाते है यह महामना है आचार्य श्री ने कहा अद्वितीय साधक को देखकर मन प्रफुल्लित हो जाता है। आज उनका दीक्षा दिवस है जो एक नई प्रेरणा देता है। वैराग्य पथ पर बढ़कर पंच इंद्रिय विषयों को छोड़ना प्रत्येक साधक का लक्ष्य होना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
