जीवन के पार्ट में आर्ट को करें शामिल : आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
बूंदी
प. पू. भारत गौरव विज्ञाश्री माताजी के ससंघ सान्निध्य में बूंदी में त्रिदिवसीय महिला सेमिनार का कार्यक्रम निर्विघ्न सम्पन्न हुआ । जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि दादाबाड़ी मन्दिर से विहार करते हुए माताजी श्री सम्भवनाथ दिगम्बर जैन मंदिर देवपुरा के दर्शन करते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर चौगान मंदिर पहुंची।

वहाँ भरी धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगर दुकानदार मावे में आटा मिलाये तो वो अपराधी है और उसी मावे में हलवाई अगर आटा मिलाये तो वह कलाकार है । ऐसे ही हमे भी हलवाई की तरह कलाकार बनना है। जीवन में कलापूर्ण कार्य वाला व्यक्ति ही हर जगह सम्मान का अधिकारी होता है। कला जीवन को सत्यम् शिवम् सुन्दरम् से समन्वित करती है। इसके द्वारा ही बुद्धि आत्मा का सत्य स्वरुप झलकता है। कला उस क्षितिज की भाँति है जिसका कोई छोर नहीं, इतनी विशाल, इतनी विस्तृत अनेक विधाओं को अपने में समेटे है कला का उदय जीवन से है, उसका उद्देश्य जीवन की व्याख्या ही नहीं वरन् उसे दिशा देना भी है और यह हमारे हाथ में है कि हमें अपने जीवन को किस दिशा में ले जाना है धर्म की या फिर संसार कीअर्थात कर्म की माताजी ने जीवन मे कला का महत्व बताते हुए कहा कि जन्म लेना तो पार्ट ऑफ लाइफ है पर हंसकर जीना आर्ट ऑफ लाइफ है स्कूल या कॉलेज जाना पार्ट ऑफ लाइफ है पर कुछ करके दिखाना आर्ट ऑफ लाइफ है दुनिया में आना और सपने सजाना पार्ट ऑफ लाइफ और सपनों को सच करके जिंदगी बनाना आर्ट ऑफ लाइफ है । तो आप सभी अपने जीवन के पार्ट कोआर्ट को शामिल करें एवं अपने जीवन में ऊंचाइयों को छुये ।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
