मुनि श्री विमलसागर महाराज सानिध्य मे गोशाला मे मानस्तभ निर्माण की रखी गयी आधारशिला

JAIN SANT NEWS शाहगढ़

मुनि श्री विमलसागर महाराज सानिध्य मे गोशाला मे मानस्तभ निर्माण की रखी गयी आधारशिला

शाहगढ़

रविवार की बेला मे नगर मे संचालित विद्यासागर दयोदय गौशाला मे मानस्तभ निर्माण की आधार्शिला रखी गयी इस आयोजन मे मुनिश्री विमलसागर महाराज ससंघ का गोरवमयी सानिध्य मिला एवं बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया लिधौरा के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। 25 फीट ऊंचाई के बनने वाले गोलाकार मानस्तंभ में भगवान आदिनाथ, नेमिनाथ, पारसनाथ और वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर की 16 प्रतिमाओं को मानस्तंभ में विराजमान किया जाएगा। जिन मानस्तम्भ निर्माण शिलान्यास समारोह विधिवत पूजन मे सुबह भक्तजनों ने उत्साह से भाग लिया इस आयोजन की शुरूआत णमोकार महामंत्र के जयकारे लगाते हुए मंगलाष्टक के साथ हुयी। इस बेला मे यंत्रजी को सिंहासन में विराजीत कर शांतिधारा की गयी साथ ही शांति विधान किया गया बाद मे हवन व समस्त क्रियाओं सम्पन्न कर मानस्तभ निर्माण के पात्रो का चयन कर ईट रखकर आधारशिला रखी गयी ।

पावन भूमि पर मानस्तंभ का निर्माण होना मूक पशुओं के लिए एक अच्छा संकेत है गोशाला पदाधिकारीगौशाला के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि शाहगढ़ की पावन भूमि पर मानस्तंभ का निर्माण होना मूक पशुओं के लिए एक अच्छा संकेत है इस कार्य के सम्पन्न हो जाने से तीर्थ वंदना को आने वाले सभी जैन धर्मावलंबियों का गोशालाओं के प्रति आस्था और बढ़ेगी और गायों की सुरक्षा, गौशाला के विकास कार्य को गति प्रदान करेगी।

गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्या सागर महाराज के शिष्य श्रमण 108 विमल सागर महाराज के पावन सानिध्य में निर्मित होने वाले भव्य मानस्तम्भ का बनना एक सौभाग्य की बात है। मुनिश्री विमल सागर महाराज ने कहा कि शाहगढ़ की धरा जहां से समीप ही तीर्थकरों के पावन चरणों से पवित्र तथा कल्याणकारी दिव्य देशना से गुंजित तीर्थ हो वहां गुरुवर का आशीर्वाद मिलना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। ऐसे पावन कार्य की हम सभी अनुमोदना करते हुए मूक पशुओं को संचालित गौशाला में सभी तन मन धन से सहयोगी बनें।

दया धर्म का मूल है,विमलसागर महाराजइस अवसर पर मुनिश्री विमलसागर महाराज ने कहा कि दया धर्म का मूल है, सभी जीवों के प्रति करुणा भाव आना ही कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करता है, मानस्तंभ में विराजमान हो रहे भगवान आदिनाथ का चिह्न बैल है, वहीं 23वें भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण प्राप्ति तिथि को आचार्य गुरुदेव ने विमल सागर, अंनत सागर, धर्मसागर सहित 23 मुनि दीक्षा दी थी, उन्होने आगे कहा भगवान नेमिनाथ का वैराग्य का कारण पशु बनें, और हम अभी भगवान महावीर के शासन में रह रहे हैं, इन्हीं के जीव रक्षा के उद्देश्य, संदेश को लेकर यहां गौशाला में चार तीर्थंकरों कि 16 प्रतिमाओं को मानस्तंभ में स्थापित किया जाएगा।

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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