साधन नही साधना का मार्ग अपनाए विज्ञाश्री

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भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी श्री दिगंबर जैन मंदिर खंडेलवाल चौगान आश्रम बूंदी में ग्रीष्म कालीन में बढ़ा रही है धर्म की प्रभावना

साधन नही साधना का मार्ग अपनाए विज्ञाश्री

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धर्म की भव्य प्रभावना बढा रही है, जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि इसी क्रम में आज जिनालय में प्रातः अभिषेक शांतिधारा बाद अष्टद्रव्यों से पूजा हुई। बाद में आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को भरी धर्म सभा में अपने मंगलमय प्रवचनों में कहा कि जिंदगी का खेल तो खेले लेकिन अपने लक्ष्य को ध्यान में रखें, क्यों कि लक्ष्य रहित जिंदगी दीमक लगे पेड़ व बिना नींव के महल की भांति है । यदि आप बिना लक्ष्य कोई कार्य करते है तो उसमें असफलता ही प्राप्त होगी । जिस प्रकार मेहंदी घिसने के बाद रंग देती है ठीक उसी प्रकार मानव को ठोकर खाने के बाद अक्ल आती है । आप सोचे कि बिना लक्ष्य के हर कार्य सम्भव है तो सबसे पहले आपको अपने अंदर की यही सोच बदलनी पड़ेगी । आप सोचे कि एक मिनट में हम जिंदगी बदल लें तो यह मुमकिन नहीं लेकिन इतना अवश्य सम्भव है आपके द्वारा लिया गया एक मिनट का निर्णय आपकी जिंदगी बदल सकता है । माताजी ने सभी समाज को राष्ट्र में जागृति लाने के उद्देश्य से कहा कि भरत के भारत ने हमें साधना करना सिखाया और अंग्रेजों के india ने हमें साधन प्रदान किये। विज्ञान के साधनों में फंसकर हम अपनी साधना , संस्कृति और संस्कारों को भूलते जा रहे है। विज्ञान के साधनों जैसे टी.वी. , मोबाईल आदि से जितना हमारे शरीर को नुकसान हो रहा है उससे कई ज्यादा नुकसान हमारे देश , राष्ट्र व समाज को हो रहा है । धर्म व संस्कृति का लोप हो रहा है । बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक के संस्कारों में कमी आ रही है। सभी अपने लक्ष्य से भटक गए हैं । इसलिए सबसे पहले तो हमें विज्ञान के साधनों को छोड़कर साधना का मार्ग अपनाना चाहिए । जिससे धर्म के साथ साथ संस्कारों में भी वृद्धि हो। और देश में अनुशासन भंग अर्थात लड़ाई – झगड़े होने से बचें । हर तरफ सुख – शांति – और समृद्धि बनी रहे। माताजी ने शरीर के साथ साथ आत्मा की बात करते हुए कहा कि जैसे नदी दो तटों के बीच सुरक्षित रहती है उसी प्रकार हमारी आत्मा , हमारा ज्ञान – दर्शन संयम अर्थात कंट्रोल करने से सुरक्षित रहता है। हम जितना साधन – सुविधाओं पर कंट्रोल करेंगे साधना उतनी प्रबल होती जाएगी । इसलिए साधन छोड़ों साधना करो यही मेरा तुम सभी के लिए आशीर्वाद है ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी

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