प. पू. भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी स संघ ने आज बूंदी शहर के सभी जिनालयों के किए दर्शन
बूंदी

भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञा श्री माताजी स संघ ने आज बूंदी शहर के सभी जिनालयों के दर्शन कर धर्म की प्रभावना बढ़ाई,माताजी धर्मप्रभावना करते हुए बूंदी के अन्य जैन मंदिरों के दर्शनार्थ गई ।

और प्रत्येक मंदिर के दर्शन करते हुए उनके चेहरे की प्रसन्नता बता रही थी कि उनका तन – मन प्रभु के दर्शनों से कितना भाव – विभोर हो रहा था। मुख में एक ही गीत गूंज रहा था तेरी प्रतिमा इतनी सुंदर तू कितना सुंदर होगा । मुनि सेवा संघ समिति और समाज के पदाधिकारीगण और बहुत से श्रावक जन गुरु माँ ससंघ के साथ दर्शनार्थ गये। उक्त संघ मंदिरों के दर्शन करता हुआ पुनः पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन चौगान मंदिर पहुँचा,

जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि वहाँ धर्मसभा में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए माताजी ने कहा कि – आज का मानव समय की कीमत करना भूल गया है किसी के पास समय नहीं है । अरे मानव जितने तीर्थंकर हुए , हमारे वीर योद्धा , राजा , क्रांतिकारी हुए उन्होंने 24 घंटे में ही स्व – पर का कल्याण किया है, 25 वां घण्टा किसी को नहीं मिला।

अरे 1 साल की कीमत उससे पूछो जो student परीक्षा में फैल हो गया।
1 माह की कीमत उस माँ से पूछो जिसने असामयिक बच्चे को जन्म दिया है
1 दिन की कीमत उससे पूछो जो दैनिक वेतन पर काम करता है
1 घण्टे की कीमत उससे पूछो जो आफिस के लिए बस का इंतजार करता है
1 मिनट की कीमत उससे पूछो जिसकी ट्रैन छूट गई हो।
1 सेकंड की कीमत उससे पूछो जिसके साथ दुर्घटना होने से बची हो ।
1 मिली सेकंड की कीमत उससे पूछो जिसने ओलम्पिक में सिल्वर मेडल जीता हो।
यह रुपया पैसा किसी के साथ नहीं जाता, सिकन्दर भी खाली हाथ ही मरा था वह अपने साथ कुछ नहीं ले जा सका। गए तो उसके साथ सिर्फ उसके कर्म,किसी के पास एक – दूसरे के लिए , परिवार , मित्रों के लिए समय ही नहीं है । सभी पैसों के लिए अपनों से दूर होते जा रहे है । व्यापार इतना चल रहा है कि खाने तक कि फुरसत नहीं है । आज का व्यक्ति ये नहीं समझ पा रहा कि वो काम करने के लिए जी रहा है या जीने के लिए काम कर रहा है। पू. माताजी ने जैन परिवार ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए संदेश दिया कि आप किसी को चाटा मारोगे तो 10 – 20 को ही मार पाओगे और यदि दोनों हाथ जोड़ लोगे तो हजारों को अपना बना लोगे। हम घर देश समाज और विश्व की लड़ाइयों को कम करना चाहते है तो हाथ जोडकर या नम्र होकर ही इसमें सफलता प्राप्त कर सकते है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने अमूल्य समय को व्यर्थ के लडाई झगड़ों में न बर्बाद करें और जन्म – मरण से छुटकारा पाने के लिए धर्म पुरुषार्थ करते हुए मोक्ष की प्राप्ति करें । क्योंकि समय परिवर्तनशील है ।
जाने कब हमारी अंतिम श्वास निकल जाये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
