परिवार के सभी छह लोगों ने करोड़ों की सम्पत्ति को दान कर, ली दीक्षा

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ये कटु सत्य है कि जब तक जीवन भौतिकता की चकांचौंध, ऐर्य-वैभव से प्रभावित रहता है, मनुष्य को संतुष्टि नहीं मिलती और वह भव-भव भटकता रहता है। जब व्यक्ति क्षणभंगुर चकाचौंध, ऐर्य-वैभव से विरक्त होता है, वह परम सुख को प्राप्त कर जाता है। ऐसी ही भावना लेकर राजनांदगांव के डकलिया परिवार के सभी छह लोगों ने करोड़ों की सम्पत्ति को त्याग, जैन साधु-साध्वी की दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिकता के पथ पर चल पड़े हैं। बता दें कि राजनांदगांव के स्थानी जैन बगीचा में श्री जिन पीयूषसागर सूरीर जी के सान्निध्य में दीक्षा कार्यक्रम दिनांक 27 जनवरी को सम्पन्न हुआ। इस दौरान समाज के सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

जानकारी के मुताबिक डाकलिया परिवार के भूपेंद्र डाकलिया, उनकी पत्नी सपना डाकलिया, पुत्र देवेंद्र एवं हषिर्त डाकलिया के साथ दो पुत्री महिमा एवं मुक्ता ने साधु-साध्वी की दीक्षा ग्रहण की। इस दौरान दीक्षा लेने वाले हषिर्त डाकलिया ने कहा कि सांसारिक जीवन में प्रभु की कृपा से कोई कमी नहीं थी। प्रभु की कृपा हम सभी परिवारीजनों पर थी किंतु हम कभी न पूरी होने वाली इच्छाओं के पीछे दौड़ते रहते हैं और अपना जीवन ब्यर्थ में गंवा देते हैं। डाकलिया परिवार ने इस सिद्धांत को अंगीकार कर दीक्षा ग्रहण की।

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